Sakat Chauth 2026: संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि के लिए करें ये खास पूजा

संतान की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए हिंदू धर्म में कई पूजा-अर्चनाएँ प्रचलित हैं, जिनमें से एक प्रमुख है सकट चौथ। यह पर्व विशेष रूप से माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएँ संतान के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए विशेष रूप से पूजा करती हैं। इस अवसर पर शुभ मुहूर्त और पूजा की सही तिथि का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। वर्ष 2026 में सकट चौथ की तिथि और समय के अनुसार पूजा का आयोजन करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
सकट चौथ पूजा के लिए कुछ जरूरी चीज़ों को शामिल करना चाहिए। सबसे पहले पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें और वहां लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएँ। पूजा में सिंदूर, हल्दी, अक्षत (चावल), दूर्वा, गेंदा और बेलपत्र का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है। इसके अलावा, एक छोटी मिट्टी की कटोरी में पानी भरकर उसमें कुंकुम और फूल डालें और इसे देवी-देवताओं के सामने रखें। इस दिन संतान के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए खीर, फल, मिठाई और दही जैसे प्रसाद का भी विशेष महत्व होता है।
पूजा में व्रती महिलाएँ सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके साफ वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। मंत्रोच्चारण के दौरान मन में केवल बच्चों की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। व्रती दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को सूर्यास्त के समय विशेष आरती और प्रसाद का वितरण करती हैं।
सकट चौथ के दिन पूजा करने से न केवल संतान की लंबी उम्र सुनिश्चित होती है, बल्कि घर में सुख-शांति और समृद्धि भी बढ़ती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किए गए उपाय और भक्ति से भगवान अपने आशीर्वाद से परिवार को हर प्रकार की विपत्तियों से बचाते हैं। इसलिए हर माता-पिता को चाहिए कि वे इस दिन पूजा में सभी जरूरी सामग्री शामिल करें और पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से आराधना करें।
सकट चौथ का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक दृष्टि से भी बहुत बड़ा है। यह पर्व परिवार को एकत्रित करने और बच्चों के लिए शुभकामनाएँ देने का भी अवसर प्रदान करता है।



