Sakat Chauth 2026: सही विधि से पारण करने पर मिलेगा व्रत का पूर्ण फल, जानें नियम

सकट चौथ 2026 का व्रत संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा किया जाता है और भगवान गणेश तथा सकट माता की पूजा को समर्पित होता है। मान्यता है कि यदि सकट चौथ का व्रत पूरे विधि-विधान और सही तरीके से पारण करके किया जाए, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। व्रत रखने के साथ-साथ उसका सही पारण करना भी उतना ही आवश्यक माना गया है, क्योंकि पारण में की गई छोटी सी गलती व्रत के पुण्य को कम कर सकती है।
सकट चौथ के दिन प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है और पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखा जाता है। शाम के समय चंद्रमा के उदय के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देना सकट चौथ का सबसे महत्वपूर्ण नियम है। अर्घ्य देते समय जल, दूध, तिल और पुष्प का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। इसके बाद चंद्र देव से संतान की रक्षा और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
पारण से पहले भगवान गणेश और सकट माता की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पूजा में तिल से बने लड्डू, गुड़, तिलकुट और मोदक का भोग लगाना विशेष फलदायी माना गया है। इसके बाद गणेश जी की आरती कर व्रत खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। ध्यान रखें कि चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बिना पारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से व्रत अधूरा माना जाता है।
पारण करते समय सबसे पहले जल या दूध ग्रहण करें, फिर प्रसाद के रूप में तिल या गुड़ का सेवन करें। कई स्थानों पर यह भी मान्यता है कि पारण से पहले संतान को भोजन कराना अत्यंत शुभ होता है। इससे व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। व्रत के दिन क्रोध, नकारात्मक विचार और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि मानसिक शुद्धता भी इस व्रत का अहम हिस्सा है।
सकट चौथ 2026 में यदि व्रती महिला सही समय पर, सही विधि से पारण करती है और पूरे दिन नियमों का पालन करती है, तो भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे संतान के जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसलिए सकट चौथ के व्रत में पूजा के साथ-साथ पारण के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।



