संकर्षण चतुर्थी आरती 2026: पूजा विधि और रिद्धि-सिद्धि का महत्व

संकर्षण चतुर्थी की पूजा में आरती का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती के बिना कोई भी पूजा पूर्ण नहीं होती। भगवान गणेश की आरती करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भक्तों के जीवन से सभी विघ्न दूर होते हैं। इसलिए इस दिन श्रद्धा से आरती करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
मान्यता है कि संकर्षण चतुर्थी पर विधिवत आरती करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। साथ ही रिद्धि और सिद्धि देवी की कृपा प्राप्त होती है, जो धन और वैभव का प्रतीक मानी जाती हैं। आरती के दौरान भक्तों का मन पूरी तरह भक्ति में लीन हो जाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस दिन “जय गणेश देवा” या “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र के साथ आरती करने से विशेष फल प्राप्त होता है। परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर आरती करने से घर का वातावरण पवित्र और शांतिपूर्ण बनता है।
संकर्षण चतुर्थी की पूजा में आरती को अंत का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। यह न केवल पूजा को पूर्णता देती है बल्कि भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा, सौभाग्य और सफलता का मार्ग भी खोलती है।



