सावन शिवरात्रि 2026: चार प्रहर पूजा विधि और रुद्राभिषेक का शुभ मुहूर्त

सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की चार प्रहर पूजा और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु रात के चारों प्रहर में अलग-अलग विधि से शिवलिंग का अभिषेक और पूजा करते हैं। जानें चार प्रहर की पूजा विधि, रुद्राभिषेक का शुभ समय और पूजा से जुड़े जरूरी नियम।
सावन शिवरात्रि 2026 पर चार प्रहर की पूजा
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन शिवरात्रि के दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं और रात में जागरण करते हुए भगवान शिव की पूजा करते हैं। इस दिन चार प्रहर में शिव पूजा करने की परंपरा है।
रात्रि को चार हिस्सों में बांटकर प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चारों प्रहर की पूजा श्रद्धा से करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
पहले प्रहर की पूजा विधि
पहले प्रहर में भगवान शिव का ध्यान करके पूजा शुरू करें। सबसे पहले शिवलिंग को स्वच्छ जल या गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद दूध से अभिषेक किया जा सकता है।
अभिषेक के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद शिवलिंग पर चंदन, अक्षत और बेलपत्र अर्पित करके धूप-दीप जलाएं।
दूसरे प्रहर की पूजा
दूसरे प्रहर में शिवलिंग का दही से अभिषेक करने की परंपरा बताई जाती है। इसके बाद स्वच्छ जल से शिवलिंग को स्नान कराएं।
बेलपत्र, फूल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
तीसरे प्रहर की पूजा
तीसरे प्रहर में शहद से अभिषेक करने की परंपरा है। शहद अर्पित करने के बाद शिवलिंग को जल से साफ करें। इसके बाद चंदन, बेलपत्र और फूल चढ़ाएं।
इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जा सकता है।
चौथे प्रहर की पूजा
चौथे प्रहर में घी से अभिषेक करने की परंपरा बताई जाती है। इसके बाद जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। अंत में भगवान शिव को बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर आरती करें।
चारों प्रहर की पूजा पूरी होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत की पूर्णता के लिए प्रार्थना करें।
रुद्राभिषेक का महत्व
सावन शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक को विशेष फलदायी माना जाता है। रुद्राभिषेक में मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है।
जल, दूध, दही, शहद और घी आदि से अभिषेक करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। हालांकि पूजा की सामग्री और विधि क्षेत्र तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
रुद्राभिषेक कब करें?
शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक के लिए रात्रि का समय विशेष माना जाता है। चार प्रहर की पूजा में रात्रि के अलग-अलग समय पर अभिषेक किया जाता है।
शुभ मुहूर्त स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार रुद्राभिषेक का समय निर्धारित करना बेहतर है। मंदिरों में रुद्राभिषेक के लिए अलग समय-सारिणी भी हो सकती है।
रुद्राभिषेक के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
रुद्राभिषेक से पहले पूजा स्थान और शिवलिंग को साफ रखें। अभिषेक में इस्तेमाल होने वाली सामग्री शुद्ध और ताजी होनी चाहिए। मंत्रों का उच्चारण श्रद्धा से करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय उसे साफ करके अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना शुभ माना जाता है।
शिवरात्रि की पूजा में क्या चढ़ाएं?
भगवान शिव की पूजा में जल और गंगाजल के साथ बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन, अक्षत, धतूरा और आक के फूल अर्पित करने की परंपरा है। भक्त अपनी श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं।
चार प्रहर पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवरात्रि की रात भगवान शिव की पूजा और जागरण का विशेष महत्व है। चार प्रहर में पूजा करने से भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण प्रकट करते हैं।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु रात में शिव मंत्रों का जाप, शिव कथा और भजन-कीर्तन भी कर सकते हैं।
पूजा के बाद व्रत कैसे खोलें?
व्रत खोलने का समय भी स्थानीय पंचांग और व्रत की परंपरा के अनुसार तय किया जाता है। व्रत खोलने के बाद हल्का और सात्त्विक भोजन करना बेहतर माना जाता है। लंबे उपवास के बाद अचानक बहुत भारी भोजन करने से बचना चाहिए।
नोट: पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त धार्मिक मान्यताओं तथा स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं। अलग-अलग स्थानों पर समय और परंपरा में अंतर हो सकता है। पूजा के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य की सलाह लेना उचित है।



