Sheetala Saptami 2026: शीतला माता की व्रत कथा पढ़े बिना अधूरी मानी जाती है पूजा

हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत देवी शीतला को समर्पित होता है, जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और शीतला सप्तमी की पौराणिक व्रत कथा सुनने या पढ़ने से भक्तों को पूर्ण फल प्राप्त होता है। साल 2026 में शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा और इस दिन घरों में माता शीतला की पूजा की जाती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण दंपति रहता था। वे बहुत श्रद्धा से शीतला माता का व्रत रखते और उनकी पूजा करते थे। एक बार शीतला सप्तमी के दिन पूरे नगर में माता की पूजा की तैयारी चल रही थी, लेकिन नगर के राजा ने इस व्रत को महत्व नहीं दिया। वहीं ब्राह्मण दंपति ने पूरी श्रद्धा से माता की पूजा की और व्रत कथा सुनी।
कथा के अनुसार, माता शीतला क्रोधित होकर राजा के राज्य में बीमारी फैला देती हैं। पूरे नगर में लोग बीमार पड़ने लगते हैं और किसी को समझ नहीं आता कि ऐसा क्यों हो रहा है। तभी ब्राह्मण दंपति राजा को शीतला माता की महिमा और व्रत की कथा बताते हैं। इसके बाद राजा को अपनी गलती का अहसास होता है और वह पूरे राज्य में शीतला माता की पूजा करवाता है।
राजा और नगर के लोग श्रद्धा से माता की पूजा करते हैं और व्रत कथा सुनते हैं। माता शीतला प्रसन्न होकर नगर को रोगों से मुक्त कर देती हैं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि शीतला सप्तमी के दिन माता की पूजा के साथ उनकी व्रत कथा जरूर पढ़ी या सुनी जाए।
इस दिन विशेष रूप से बासी भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसे “बसोड़ा” कहा जाता है। मान्यता है कि इससे माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोगों से दूर रखती हैं। श्रद्धालु सुबह स्नान करके माता शीतला की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा और नियम से शीतला सप्तमी का व्रत रखते हैं और व्रत कथा पढ़ते हैं, उनके जीवन से रोग, कष्ट और परेशानियां दूर हो जाती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।



