पुत्र प्राप्ति और सुख-समृद्धि का संयोग: वैष्णव पुत्रदा एकादशी पर बन रहा विशेष त्रिपुष्कर योग

वैष्णव पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी व्रत मानी जाती है। यह एकादशी विशेष रूप से संतान सुख, परिवार की उन्नति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के लिए रखी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से न केवल पुत्र प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है, बल्कि संतान के जीवन में यश, स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद भी मिलता है। इस वर्ष वैष्णव पुत्रदा एकादशी पर 2 घंटे 14 मिनट का दुर्लभ मुहूर्त बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस एकादशी पर त्रिपुष्कर योग का विशेष संयोग बन रहा है। त्रिपुष्कर योग को बेहद फलदायी माना जाता है, क्योंकि इस योग में किए गए शुभ कार्यों का फल सामान्य से दोगुना मिलता है। मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा, दान और व्रत का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। यही कारण है कि वैष्णव पुत्रदा एकादशी पर इस योग का महत्व और भी बढ़ जाता है।
इस शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना विशेष लाभकारी माना जाता है। श्रद्धालुओं को प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए और पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्वलित करना चाहिए। तुलसी दल, पीले फूल, फल और पंचामृत से पूजा करने से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि वैष्णव पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है और जिनके संतान हैं, उनके लिए यह व्रत बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। त्रिपुष्कर योग में दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा देने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
कुल मिलाकर, वैष्णव पुत्रदा एकादशी पर बनने वाला 2 घंटे 14 मिनट का दुर्लभ मुहूर्त और त्रिपुष्कर योग भक्तों के लिए एक सुनहरा अवसर है। इस शुभ संयोग में श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का वास होता है।



