Teachers Day 2026: ‘गुरु गोबिंद दोऊ खड़े’ समेत पढ़ें कबीर के प्रसिद्ध दोहे और उनके अर्थ

हर साल 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। भारतीय संत परंपरा में गुरु को ज्ञान का मार्ग दिखाने वाला माना गया है। संत कबीर दास ने भी अपने दोहों में गुरु के महत्व, ज्ञान और शिष्य के जीवन में गुरु की भूमिका को बेहद प्रभावशाली ढंग से समझाया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर पढ़िए कबीर के ऐसे प्रसिद्ध दोहे और उनके सरल अर्थ।
‘गुरु गोबिंद दोऊ खड़े…’ दोहा
गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, काके लागू पांय।
बलिहारी गुरु आपने, गोबिंद दियो बताय॥
अर्थ:
कबीर दास कहते हैं कि यदि गुरु और भगवान दोनों सामने खड़े हों तो पहले किसके चरण स्पर्श किए जाएं? ऐसी स्थिति में गुरु को पहले प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही भगवान तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं।
यह दोहा गुरु को ज्ञान और सही दिशा देने वाली शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
‘गुरु कुम्हार शिष कुंभ है…’
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट।
अंतर हाथ सहार दे, बाहर बाहै चोट॥
अर्थ:
कबीर गुरु की तुलना कुम्हार से और शिष्य की तुलना मिट्टी के घड़े से करते हैं। जिस तरह कुम्हार घड़े को आकार देने के लिए बाहर से थपकी देता है, लेकिन अंदर से हाथ का सहारा भी देता है, उसी तरह गुरु शिष्य की कमियां दूर करने के लिए उसे अनुशासन में रखते हैं।
इस दोहे का संदेश है कि गुरु की डांट या अनुशासन के पीछे भी शिष्य के हित की भावना होती है।
‘सब धरती कागद करूं…’
सब धरती कागद करूं, लेखनि सब बनराय।
सात समुद्र की मसि करूं, गुरु गुण लिखा न जाय॥
अर्थ:
कबीर कहते हैं कि यदि पूरी धरती को कागज बना दिया जाए, सारे जंगलों की लकड़ी से कलम तैयार कर ली जाए और सातों समुद्रों के पानी को स्याही बना दिया जाए, तब भी गुरु के गुणों का पूरा वर्णन नहीं किया जा सकता।
यह दोहा गुरु के प्रति असीम सम्मान और कृतज्ञता को व्यक्त करता है।
‘बलिहारी गुरु आपने…’
कबीर की वाणी में गुरु के प्रति कृतज्ञता बार-बार दिखाई देती है। उनके अनुसार सच्चा गुरु केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि शिष्य को स्वयं को समझने और जीवन का सही रास्ता पहचानने की दृष्टि देता है।
इसीलिए गुरु को केवल पढ़ाने वाले व्यक्ति के बजाय जीवन का मार्गदर्शक माना गया है।
कबीर के दोहों में गुरु का महत्व
कबीर की शिक्षाओं में गुरु का स्थान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरु अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाला माध्यम है। गुरु शिष्य को बाहरी दिखावे से दूर करके आत्मचिंतन और सत्य की ओर प्रेरित करता है।
आज के संदर्भ में भी शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं है। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थियों में सोचने, सवाल पूछने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है।
शिक्षक दिवस पर कबीर के दोहों से क्या सीखें?
Teachers Day 2026 पर कबीर के दोहे हमें याद दिलाते हैं कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है। शिक्षा व्यक्ति के विचार, व्यवहार और व्यक्तित्व को भी बेहतर बनाती है।
गुरु का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित न रखकर उनके द्वारा दिए गए ज्ञान और मूल्यों को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान माना जा सकता है।
निष्कर्ष
संत कबीर दास के दोहों में गुरु, ज्ञान और जीवन-मूल्यों की गहरी समझ दिखाई देती है। ‘गुरु गोबिंद दोऊ खड़े’ जैसे दोहे भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा में गुरु के महत्व को बेहद सरल शब्दों में समझाते हैं।
इस शिक्षक दिवस पर अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ उनके दिए ज्ञान को जीवन में अपनाने का संकल्प लेना सबसे खूबसूरत श्रद्धांजलि हो सकती है।
डिस्क्लेमर: कबीर के दोहों के पाठ में विभिन्न संकलनों और संस्करणों के अनुसार मामूली शब्दांतर मिल सकता है। यहां दिए अर्थ दोहों के प्रचलित भावार्थ पर आधारित हैं।



