Malmas 2026 का रहस्य: क्यों 13 महीने का माना जा रहा है साल, दो माह तक मलमास रहने का कारण

Malmas 2026 को लेकर लोगों के मन में कई तरह की जिज्ञासाएं हैं। नए साल में यह चर्चा तेज है कि क्या 2026 में साल 13 महीनों का हो जाएगा और क्या वाकई दो महीने तक मलमास रहेगा। दरअसल, मलमास को हिंदू पंचांग में अधिक मास भी कहा जाता है, जो सूर्य और चंद्र गणना के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जोड़ा जाता है। हिंदू कैलेंडर चंद्र मास पर आधारित होता है, जबकि सूर्य वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है। इसी अंतर को समायोजित करने के लिए लगभग हर 32 महीने, 16 दिन और 8 घंटे में एक अधिक मास जोड़ा जाता है, जिसे मलमास कहा जाता है।
Malmas 2026 का संयोग इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह नए साल के दौरान पड़ रहा है और इसकी अवधि अपेक्षाकृत लंबी बताई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास के दौरान मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण आदि वर्जित माने जाते हैं। हालांकि, यह समय आध्यात्मिक साधना, जप, तप, दान और भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी कारण इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
यह भ्रम भी फैल रहा है कि 2026 में 13 महीने होंगे। वास्तव में ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार साल 12 महीनों का ही रहेगा, लेकिन हिंदू पंचांग की दृष्टि से एक अतिरिक्त मास जुड़ने के कारण इसे 13 महीनों वाला वर्ष कहा जा रहा है। दो महीने तक मलमास रहने का अर्थ यह नहीं है कि लगातार 60 दिन अशुभ होंगे, बल्कि यह चंद्र मास की विशेष स्थिति को दर्शाता है, जिसमें सूर्य संक्रांति नहीं होती।
धार्मिक दृष्टि से मलमास को नकारात्मक नहीं माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दौरान किया गया भजन, कथा श्रवण, विष्णु सहस्रनाम पाठ और दान-पुण्य कई गुना फल देता है। इसलिए Malmas 2026 को डर या भ्रम की नजर से नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और साधना के अवसर के रूप में देखना चाहिए। कुल मिलाकर, 2026 में मलमास का यह दुर्लभ संयोग पंचांगीय गणना का हिस्सा है, न कि किसी अनहोनी का संकेत।



