Vijaya Ekadashi 2026: विजय दिलाने वाली एकादशी, पढ़ें भगवान राम की प्रेरक कथा

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह एकादशी विजय प्रदान करने वाली मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी भक्त इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखता है, उसे जीवन के कठिन से कठिन कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने भी लंका पर चढ़ाई करने से पहले इस व्रत का पालन किया था। समुद्र पार कर रावण पर विजय पाना आसान नहीं था। तब ऋषि-मुनियों के परामर्श से श्रीराम ने विजया एकादशी का व्रत किया, पूजा-अर्चना की और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी व्रत के प्रभाव से उन्हें युद्ध में विजय मिली और माता सीता की वापसी संभव हो सकी।
विजया एकादशी का व्रत केवल बाहरी शत्रुओं पर जीत दिलाने के लिए ही नहीं, बल्कि मन के भीतर मौजूद भय, संदेह और नकारात्मकता को भी दूर करने वाला माना जाता है। इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करते हैं, कथा सुनते हैं और रात में जागरण भी करते हैं। कई स्थानों पर कलश स्थापना कर विशेष पूजन का विधान है। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत व्यक्ति के सभी अटके कार्यों को पूरा करने में सहायक होता है और भाग्य के बंद दरवाजे खोल देता है।
धार्मिक दृष्टि से यह एकादशी आत्मविश्वास, धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान राम की कथा हमें बताती है कि जब स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम ने भी विजय के लिए नियम और श्रद्धा का सहारा लिया, तो आम मनुष्य के लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी हो सकता है। इसलिए विजया एकादशी को सफलता, सकारात्मकता और ईश्वर कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है।



