सोनल दिनुशा की कहानी, कभी बल्ले के पैसे नहीं थे अब बने भारत के लिए काल

भारत के खिलाफ श्रीलंका की टेस्ट सीरीज में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा और वह है सोनल दिनुशा। कोलंबो टेस्ट में दिनुशा ने जिस तरह भारतीय गेंदबाजों का सामना किया, उसने क्रिकेट फैंस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी जुझारू बल्लेबाजी ने श्रीलंका को लगभग तय दिख रही हार से बचा लिया।
दिनुशा ने इस दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 420 रन बनाए और उनका औसत 140 रहा। उन्होंने तीन शतक और एक अर्धशतक लगाया। कोलंबो में दूसरी पारी में नाबाद 133 रन बनाकर उन्होंने श्रीलंका को भारत के खिलाफ मैच ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई।
लेकिन सोनल दिनुशा की यह सफलता आसानी से नहीं आई। उनके शुरुआती दिनों में परिवार की आर्थिक स्थिति काफी मुश्किल थी। उनके कोच के मुताबिक, उस समय परिवार के पास क्रिकेट बैट और जरूरी सामान खरीदने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं थे।
दिनुशा का पहला क्रिकेट बैट उनकी बहन ने उधार पैसे लेकर खरीदा था। परिवार के त्याग और दिनुशा की मेहनत ने उनके क्रिकेट करियर की नींव रखी। आज क्रिकेट से होने वाली कमाई उनके परिवार की आय का अहम जरिया बन चुकी है।
दिलचस्प बात यह है कि दिनुशा शुरू में बास्केटबॉल में भी दिलचस्पी रखते थे। उनके स्कूल कोच ने उन्हें खेलते हुए देखा और क्रिकेट टीम में शामिल कर लिया। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाते चले गए।
उनके खेल की सबसे बड़ी ताकत परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालना है। स्पिन के खिलाफ स्वीप और रिवर्स स्वीप पर उन्होंने घंटों अभ्यास किया। भारत के खिलाफ सीरीज में यही शॉट उनकी सबसे बड़ी ताकत बने और उन्होंने स्वीप से 173 रन बनाए।
कोलंबो टेस्ट में भारत ने श्रीलंका को फॉलोऑन कराया था और जीत के लिए टीम इंडिया को सिर्फ चार विकेट चाहिए थे। लेकिन दिनुशा ने एक छोर संभालकर भारतीय गेंदबाजों को लगातार परेशान किया। उन्होंने लंबी पारी खेली और नाबाद 133 रन बनाकर श्रीलंका को मुकाबला बचाने में मदद की।
सोनल दिनुशा की कहानी संघर्ष, परिवार के त्याग और लगातार मेहनत की मिसाल है। जिस खिलाड़ी के पास कभी अपना क्रिकेट बैट खरीदने तक के पैसे नहीं थे, उसी ने कुछ साल बाद भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ तीन शतक जड़कर अपनी पहचान बना ली। उनकी यह पारी श्रीलंकाई क्रिकेट के लिए एक नए सितारे के उदय का संकेत मानी जा रही है।



