ICC के रवैये से निराश USA खिलाड़ी की अपील, एसोसिएट देशों के लिए उठाई आवाज

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फुल मेंबर और एसोसिएट देशों के बीच मौजूद अंतर को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब ICC की नीतियों से निराश एक United States national cricket team के खिलाड़ी ने खुलकर अपनी बात रखी। खिलाड़ी का कहना है कि एसोसिएट देशों को बड़े मंच, नियमित सीरीज और आर्थिक सहयोग के मामले में अब भी बराबरी का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उनके मुताबिक क्रिकेट को सच में वैश्विक खेल बनाना है तो उभरती टीमों को सिर्फ क्वालिफायर तक सीमित रखने की सोच बदलनी होगी।
खिलाड़ी ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका समेत कई देशों में क्रिकेट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है, स्टेडियम बन रहे हैं, लीग संरचना मजबूत हो रही है और युवा प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त मैच न मिलने से खिलाड़ियों का विकास प्रभावित होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक एसोसिएट टीमों को शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलने का मौका नहीं मिलेगा, तब तक अनुभव और आत्मविश्वास दोनों की कमी बनी रहेगी।
बयान में यह भी सामने आया कि आईसीसी को राजस्व वितरण और टूर्नामेंट संरचना पर दोबारा विचार करना चाहिए। बड़े देशों को मिलने वाली सुविधाओं की तुलना में छोटे बोर्ड काफी पीछे रह जाते हैं। ऐसे में टैलेंट होने के बावजूद वे लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाते। खिलाड़ी ने अपील की कि अगर क्रिकेट को नए बाजारों में फैलाना है, खासकर अमेरिका जैसे देशों में, तो निवेश और अवसर दोनों बढ़ाने होंगे।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी एसोसिएट टीम को बड़ी प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिलता है, तो वहां के युवाओं में खेल के प्रति उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। स्पॉन्सरशिप आती है, घरेलू ढांचा सुधरता है और प्रोफेशनलिज्म बढ़ता है। इसलिए आईसीसी को अल्पकालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीति अपनानी चाहिए।
खिलाड़ी की इस खुली अपील के बाद क्रिकेट जगत में चर्चा तेज हो गई है। कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों का भी मानना है कि खेल के विस्तार के लिए बराबरी का अवसर जरूरी है। अब देखना होगा कि आईसीसी इस तरह उठ रही आवाजों पर कितना ध्यान देता है और भविष्य में एसोसिएट देशों के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।



