झज्जर के पहलवान ने अंडर-17 कुश्ती में गोल्ड जीता | ग्रीस में रचा इतिहास
हरियाणा के झज्जर जिले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह भारत की कुश्ती की नर्सरी है। हाल ही में ग्रीस में आयोजित हुई अंडर-17 कुश्ती चैंपियनशिप में झज्जर के युवा पहलवान राहुल (परिवर्तित नाम) ने अपने शानदार प्रदर्शन से स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ भारत का नाम रोशन किया, बल्कि अपने कोच और परिवार का सपना भी पूरा किया।
यह चैंपियनशिप ग्रीस के एथेंस शहर में आयोजित की गई थी, जिसमें दुनिया भर के चुनिंदा युवा पहलवानों ने हिस्सा लिया। राहुल ने 60 किलोग्राम भारवर्ग में खेलते हुए अपनी तकनीक, ताकत और दांव-पेच से सभी को चौंका दिया। सेमीफाइनल में उसने कज़ाकिस्तान के खिलाड़ी को हराया, और फाइनल में ईरान के पहलवान को शिकस्त देकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
राहुल के कोच, जो वर्षों से झज्जर के ग्रामीण अखाड़े में बच्चों को ट्रेनिंग दे रहे हैं, ने बताया कि राहुल शुरू से ही मेहनती और फोकस्ड था। उन्होंने कहा, “यह तो सिर्फ शुरुआत है, हमारा असली सपना है कि यह लड़का एक दिन ओलिंपिक में भारत के लिए पदक जीते।”
राहुल की इस सफलता के बाद पूरे गांव में जश्न का माहौल है। स्कूल, पंचायत और जिले के खेल अधिकारी सभी ने उसका स्वागत किया और सम्मानित किया। उसके माता-पिता, जो किसान हैं, ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि उनका बेटा विदेश जाकर देश के लिए तिरंगा लहराएगा।
इस जीत के बाद राहुल को अब नेशनल कैम्प में शामिल किया जाएगा, जहां ओलिंपिक और एशियन गेम्स जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। हरियाणा सरकार और भारतीय कुश्ती संघ ने भी राहुल की जीत की सराहना करते हुए उसे आर्थिक सहायता और स्कॉलरशिप देने का वादा किया है।
भारत में कुश्ती एक पारंपरिक खेल रहा है, लेकिन अब युवा खिलाड़ियों की मेहनत और आधुनिक ट्रेनिंग के साथ यह ग्लोबल स्तर पर छा रहा है। राहुल जैसे पहलवान यह दिखा रहे हैं कि ग्रामीण भारत की मिट्टी से भी चैंपियन निकल सकते हैं, जिन्हें सही मार्गदर्शन और प्लेटफॉर्म मिले तो वे दुनिया जीत सकते हैं।
राहुल की यह सफलता देश के उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेल में करियर बनाना चाहते हैं। उसकी कहानी बताती है कि जुनून, मेहनत और समर्पण के साथ कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है।



