हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी टीम इंडिया की कप्तानी

भारतीय महिला क्रिकेट टीम में बड़ा बदलाव हुआ है। लंबे समय से टीम की कप्तानी कर रहीं हरमनप्रीत कौर ने मंगलवार को सभी फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी।
हरमनप्रीत ने अपने पोस्ट में कहा कि कप्तानी छोड़ना उनके लिए आसान फैसला नहीं था। उनके नेतृत्व के इस सफर में कई सालों की यादें, भावनाएं, त्याग और मुश्किल दौर जुड़े रहे हैं। उन्होंने टीम और भारतीय महिला क्रिकेट के लिए अपना सबकुछ देने की बात भी कही।
हरमनप्रीत ने यह भी स्पष्ट किया कि कप्तानी छोड़ने का मतलब क्रिकेट से दूरी बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि अब वह खेल के प्रति अपने प्यार के लिए फिर से खेलने को तैयार हैं। यानी वह भारतीय टीम के लिए बतौर खिलाड़ी उपलब्ध रहेंगी।
हरमनप्रीत कौर का कप्तानी करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उनकी अगुआई में भारत ने 2025 में पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया। हाल ही में उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 2026 एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता।
हरमनप्रीत ने भारत की टी20 टीम की कप्तानी 2016 में संभाली थी। इसके बाद 2022 में उन्हें वनडे कप्तानी मिली और वह ऑल-फॉर्मेट कप्तान बनीं। उन्होंने भारत के लिए 5 टेस्ट, 51 वनडे और रिकॉर्ड 155 टी20 इंटरनेशनल मैचों में कप्तानी की।
अपने भावुक संदेश में हरमनप्रीत ने कहा कि कप्तान के तौर पर कई बार उन्हें अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन, विकास और निजी महत्वाकांक्षाओं को पीछे रखना पड़ा, क्योंकि उनके लिए टीम सबसे पहले थी। उन्होंने मुश्किल हार, आलोचना और दबाव के साथ जीत और जश्न के पलों को भी याद किया।
हरमनप्रीत ने कप्तानी से विदाई लेते हुए कहा कि वह भावनाओं से भरे दिल के साथ यह जिम्मेदारी छोड़ रही हैं, लेकिन उन्हें सुकून है कि भारतीय टीम इस समय अच्छी स्थिति में है। उन्होंने टीम के भविष्य को लेकर भरोसा जताया और कहा कि टीम में प्रतिभा, चरित्र और विश्वास मौजूद है।
हरमनप्रीत के बाद भारतीय महिला टीम की कप्तानी को लेकर स्मृति मंधाना का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। मंधाना लंबे समय से हरमनप्रीत की डिप्टी रही हैं, हालांकि नए कप्तान का आधिकारिक ऐलान अलग से होना बाकी है।
हरमनप्रीत कौर का कप्तानी छोड़ने का फैसला ऐसे समय आया है जब भारतीय महिला टीम ने हाल के वर्षों में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। अब उनकी भूमिका एक अनुभवी खिलाड़ी के तौर पर टीम के लिए अहम रहने वाली है। कप्तानी का अध्याय भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट के साथ उनका सफर जारी रहेगा।



