यूपी ज्ञान भारतम् मिशन के तहत 12.20 लाख पांडुलिपियां हुईं डिजिटल, वाराणसी रहा सबसे आगे

उत्तर प्रदेश में प्राचीन ज्ञान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में चल रहे यूपी ज्ञान भारतम् मिशन के तहत अब तक 12.20 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। यह अभियान दुर्लभ और ऐतिहासिक दस्तावेजों को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
मिशन का उद्देश्य राज्यभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों, धार्मिक ग्रंथों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और ज्ञान-संपदा को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन महत्वपूर्ण स्रोतों तक आसानी से पहुंच सकें।
इस अभियान में वाराणसी सबसे आगे रहा है। धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस शहर में बड़ी संख्या में दुर्लभ पांडुलिपियां संरक्षित हैं, जिनके डिजिटलीकरण का कार्य तेजी से किया गया है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी विभिन्न संस्थानों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में उपलब्ध पांडुलिपियों को डिजिटल रूप दिया जा रहा है।
डिजिटलीकरण की प्रक्रिया के तहत पांडुलिपियों की उच्च गुणवत्ता वाली स्कैनिंग, वर्गीकरण और डिजिटल संग्रहण किया जा रहा है। इससे न केवल मूल दस्तावेजों को क्षति से बचाया जा सकेगा, बल्कि शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और विद्वानों के लिए अध्ययन भी आसान होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध सामग्री शोध और अकादमिक कार्यों को भी नई दिशा दे सकती है।
राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक पांडुलिपियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर उन्हें सुरक्षित और सुलभ बनाना है। ज्ञान भारतम् मिशन को उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण की प्रमुख परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।



