यूपी के आलू किसानों को बड़ी राहत, भामाशाह कोष से मिलेगा भावांतर

उत्तर प्रदेश के आलू किसानों के लिए सरकार ने बड़ी राहत की पहल की है। आलू का उत्पादन अधिक होने पर बाजार भाव में गिरावट से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भामाशाह भाव स्थिरता कोष बनाया गया है। सरकार ने इसके लिए 1000 करोड़ रुपये के कोष का प्रावधान किया है, जिसमें फिलहाल 100 करोड़ रुपये की टोकन राशि उपलब्ध कराई गई है।
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को आलू किसानों के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया। इस पोर्टल के माध्यम से करीब 15 लाख आलू किसानों को तीन अलग-अलग योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। किसान योजनाओं से जुड़ी जानकारी और आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सकेंगे।
भामाशाह भाव स्थिरता कोष के तहत बाजार में आलू का उचित मूल्य नहीं मिलने पर किसानों को भावांतर सहायता दी जाएगी। सरकार के अनुसार निर्धारित उत्पादन लागत और बिक्री दर के बीच अंतर को ध्यान में रखते हुए अनुदान दिया जाएगा। सहायता की गणना तय नियमों के अनुसार की जाएगी, जिससे बाजार में कीमत गिरने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
योजना के तहत प्रति किसान अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र और प्रति हेक्टेयर 240 क्विंटल आलू पर अनुदान का प्रावधान है। पात्र किसानों को मिलने वाली राशि सीधे उनके आधार लिंक बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। इससे सहायता राशि के वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सरकार ने कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू के लिए भी राहत का प्रावधान किया है। किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान मिलेगा और एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक का लाभ दिया जा सकेगा। इसके अलावा आलू बीज की खरीद पर भी प्रति क्विंटल 1000 रुपये की छूट का प्रावधान बताया गया है।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना भी है। बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान भावांतर सहायता मिलने से किसानों पर आर्थिक दबाव कम हो सकता है। साथ ही भंडारण और बिक्री से जुड़ी लागत में राहत मिलने की उम्मीद है।
नई ऑनलाइन व्यवस्था से किसानों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रक्रिया अधिक आसान और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। सरकार ने किसानों से योजनाओं के संबंध में केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन और लाभ वितरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाएगा।
आलू किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार अंतरराज्यीय व्यापार पर भी जोर दे रही है। दूसरे राज्यों में उत्तर प्रदेश के आलू के लिए नए बाजार तलाशने और खरीदारों से संपर्क बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अधिक विकल्प मिलने की उम्मीद है।



