उत्तर प्रदेशमऊ

मऊ नगर पालिका में भाजपा ने सामान्य सीट पर भी खेला दलित कार्ड

  • बदले परिसीमन से बिगड़ सकता है विपक्षी दलों का चुनावी गणित

मऊ। नगर पालिका निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने मऊ पालिका अध्यक्ष पद के लिए रविवार को अनारक्षित सीट पर भी दलित कार्ड खेला है। भाजपा की इस चुनावी गणित ने विपक्षी सभी राजनीतिक दलों का गुणा-भाग बिगाड़ दिया। भाजपा ने इस सीट पर बीते साल बसपा छोड़कर आए अजय कुमार को उम्मीदवार बनाया है।

नगर क्षेत्र के औरंगाबाद मोहल्ले के मूल निवासी अजय कुमार ने बहुजन समाज पार्टी से 2000 में अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की। बसपा में रहते हुए अजय को बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां मिली। इनमें मंडल कोऑर्डिनेटर से लेकर उत्तर प्रदेश में मायावती के मुख्यमंत्री बनने पर उनकी सरकार में राज्यमंत्री भी रहे। पिछले साल 31 जनवरी 2022 को बसपा छोड़ अजय ने भाजपा में शामिल हो गए। तब भाजपा की इस नीति को लेकर जिले में सियासी पारा भी गरम रहा।

नए परिसीमन के भाजपा ने अजय पर लगाया दांव

नए परिसीमन में 54 गांव मऊ नगर पालिका में सम्मिलित हुए हैं। पिछले चार दशक से एक ही समुदाय के लोगों का अध्यक्ष पद पर कब्जा यहां पर जमा हुआ है। बहुतायत मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण नगर पालिका अध्यक्ष पद पर पिछले 30-40 वर्षों से मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जाते रहें और जीतकर अध्यक्ष पद पर काबिज रहे। लेकिन इस बार नगर पालिका की सामान्य सीट होने के बावजूद भी भाजपा ने यहां दलित मतदाताओं में सेंध लगाने के लिए दल बदलू उम्मीदवार पर भरोसा जताया है। सोमवार को नामांकन का आखरी दिन है। अजय कुमार का भाजपा हाईकमान द्वारा उम्मीदवार घोषित होने पर स्थानीय स्तर पर पार्टी के अंदर भूचाल सा आ गया। दबी जुबान से पार्टी के कार्यकर्ता जो बरसों से चुनावी तैयारी कर रहे थे उनकी उम्मीदों पर हाईकमान ने पानी फेरने पर तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व और अनुशासन के चलते कार्यकर्ता एकजुट नजर आ रहे हैं।

इस सीट पर नगर विकास मंत्री का आता है गांव

मऊ नगर पालिका क्षेत्र में इस बार उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास मंत्री एके शर्मा का गांव भी शामिल किया गया है। उनका गांव नए परिसीमन में शामिल हुआ है। इसलिए भाजपा इसे अपनी प्रतिष्ठा की सीट मान रही है।

सपा ने नया तो बसपा ने दल बदलू को बनाया उम्मीदवार

समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर अपने दो पूर्व दिग्गज पालिका अध्यक्षों को दरकिनार कर नए चेहरे पर भरोसा जताया। बहुजन समाज पार्टी ने अरशद जमाल को अपना उम्मीदवार बनाया। अरशद को सपा से टिकट ना मिलने के कारण दल बदलकर बसपा से अपना भाग्य आजमा रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना

इस सीट पर दिलचस्प यह होगा कि इस बार समीकरण बदला हुआ नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों की माने तो नए परिसीमन से मुस्लिम वोटरों को टक्कर देने के लिए अन्य जाति के लोग भी शामिल हो गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ अरुण सिंह का कहना है कि इस बार नए परिसीमन के चलते मतदाताओं का समीकरण भी बदल गया है। इससे एक वर्ग विशेष की संख्या में भी अंतर आया है। बदल मतदाता समीकरण के चलते इस बार निकाय चुनाव में उलटफेर देखने काे मिलेगा। इससे वर्षों से एक वर्ग से आने वाले उम्मीदवारों की जीत आसान नहीं होगी और नजीता राष्ट्रहित में आएंगे। फिलहाल 13 मई को फैसला होगा कि किस दल का उम्मीदवार नगरपालिका का अध्यक्ष बनेगा।

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