चंद्रग्रहण के दौरान सीएम योगी ने किया व्रत, गोरखनाथ मंदिर में परंपरा का पालन; प्रशासन को दिए अहम दिशा-निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंद्रग्रहण के अवसर पर पारंपरिक आस्था का पालन करते हुए उपवास रखा और गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर के कपाट नियमानुसार बंद कराए गए। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में पूजा-पाठ और मंदिरों के पट बंद रखने की परंपरा रही है, जिसका पालन मंदिर प्रशासन द्वारा विधिवत किया गया। मंदिर परिसर में विशेष साफ-सफाई, शुद्धिकरण और ग्रहण समाप्ति के बाद पूजन-अर्चन की तैयारियां भी पहले से सुनिश्चित की गईं।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान न केवल धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी पूरा ध्यान बनाए रखा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रहण के समय किसी भी प्रकार की अफवाह या अव्यवस्था न फैले, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाने के आदेश भी दिए गए।
इसके साथ ही सीएम योगी ने विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में चल रही परियोजनाओं की गति किसी भी परिस्थिति में धीमी नहीं पड़नी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली और पेयजल परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया।
गोरखनाथ मंदिर में ग्रहण समाप्ति के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पुनः कपाट खोले गए और श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई। मंदिर प्रशासन ने बताया कि पूरे कार्यक्रम को परंपरा और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संपन्न कराया गया। मुख्यमंत्री के इस कदम को आस्था और प्रशासनिक सजगता के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है, जहां धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ प्रदेश की सुरक्षा और विकास को भी समान प्राथमिकता दी गई।



