बिजली न देने पर 7.18 लाख का जुर्माना

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं द्वारा रिचार्ज करने के बावजूद निर्धारित समय के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं किए जाने के मामले में पावर कॉरपोरेशन पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई उपभोक्ता सेवाओं में लापरवाही और तय मानकों के उल्लंघन को लेकर की गई बताई जा रही है।
मामले के अनुसार, प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के रिचार्ज के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर बिजली बहाल की जानी चाहिए। लेकिन कई मामलों में उपभोक्ताओं को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा। शिकायतों और जांच के बाद संबंधित प्राधिकरण ने इसे सेवा मानकों का उल्लंघन माना।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल और प्रीपेड बिजली व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक सेवा उपलब्ध कराना है। यदि रिचार्ज के बाद भी समय पर बिजली आपूर्ति नहीं मिलती, तो इससे पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए जरूरी माना जाता है।
इस कार्रवाई को बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इससे बिजली वितरण कंपनियों पर सेवा गुणवत्ता सुधारने और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही उपभोक्ताओं को भी यह संदेश मिलेगा कि उनकी शिकायतों पर नियामक संस्थाएं कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।



