उत्तर प्रदेश

यूपी की विद्युत सखी योजना का कमाल, 16 हजार महिलाओं ने वसूला ₹3,500 करोड़ बिजली बिल

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई विद्युत सखी योजना अब बिजली बिल वसूली के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभा रही है। इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं गांवों में घर-घर जाकर बिजली बिल जमा कराने में मदद करती हैं। 2020 में शुरू हुए इस मॉडल को उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के सहयोग से लागू किया गया था।

16 हजार महिलाओं ने किया बड़ा काम

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 16 हजार विद्युत सखियों ने मिलकर ₹3,500 करोड़ के बिजली बिल की वसूली कराई है। इस काम के बदले महिलाओं को कमीशन मिलता है और अब तक उन्होंने करीब ₹45 करोड़ की आय अर्जित की है।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बिल जमा करने की सुविधा लोगों के घर के नजदीक उपलब्ध हुई है और महिलाओं के लिए आय का एक अतिरिक्त जरिया भी तैयार हुआ है।

घर बैठे बिल भुगतान की सुविधा

विद्युत सखी मॉडल की खासियत इसका स्थानीय और अंतिम छोर तक पहुंच वाला सिस्टम है। ग्रामीण उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए दूर स्थित कार्यालय या कलेक्शन सेंटर जाने की जरूरत कम होती है।

महिलाएं डिजिटल माध्यम से बिल भुगतान में मदद करती हैं। इससे बिजली विभाग के लिए बिल कलेक्शन आसान होने के साथ उपभोक्ताओं के लिए भुगतान की सुविधा भी बढ़ती है। CEEW के 2026 के अध्ययन के अनुसार, यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली भुगतान की पहुंच और डिस्कॉम की राजस्व वसूली, दोनों को बेहतर करने के उद्देश्य से काम करता है।

महिलाओं को मिल रहा रोजगार

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा महिला सशक्तिकरण के रूप में देखा जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को बिजली बिल कलेक्शन का काम मिलने से उनकी नियमित आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ती है।

यानी योजना में एक तरफ बिजली विभाग को बिल वसूली में मदद मिलती है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम और आय का अवसर मिलता है।

पहले भी बड़ी रकम वसूल चुकी हैं विद्युत सखियां

2026 में सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि विद्युत सखियों ने बिजली बकाया वसूली में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच 15 हजार से अधिक विद्युत सखियों ने करीब ₹657 करोड़ के बकाया बिजली बिल की वसूली में मदद की थी। इस दौरान लगभग 17.75 लाख बकाया खातों का निपटारा हुआ था।

वहीं मार्च 2026 की एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में विद्युत सखियों की संख्या करीब 30 हजार और उनके जरिए ₹3,250 करोड़ से अधिक बिजली भुगतान की सुविधा दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे स्पष्ट है कि अलग-अलग समय और अभियान के आधार पर योजना के आंकड़ों में बदलाव हो सकते हैं।

योजना से तीन बड़े फायदे

1. महिलाओं की कमाई:
बिजली बिल कलेक्शन पर मिलने वाले कमीशन से महिलाओं को आय का स्रोत मिलता है।

2. ग्रामीण उपभोक्ताओं को सुविधा:
स्थानीय स्तर पर बिल जमा करने की सुविधा मिलने से भुगतान आसान होता है।

3. बिजली विभाग की वसूली:
समय पर बिल भुगतान बढ़ने से डिस्कॉम के राजस्व संग्रह को मदद मिलती है।

कैसे काम करती है विद्युत सखी योजना?

विद्युत सखियां आम तौर पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं होती हैं। उन्हें बिल भुगतान और संबंधित डिजिटल प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इसके बाद वे अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं से बिजली बिल का भुगतान करवाने में मदद करती हैं।

CEEW के अनुसार, इस कार्यक्रम को UPSRLM और UPPCL ने 2020 में शुरू किया था और इसका उद्देश्य ग्रामीण बिजली सेवाओं में महिलाओं को शामिल करना था।

एक नजर में

आंकड़ा जानकारी
विद्युत सखियां करीब 16,000*
बिजली बिल वसूली ₹3,500 करोड़*
महिलाओं की आय ₹45 करोड़*
योजना की शुरुआत 2020
प्रमुख संस्थाएं UPSRLM और UPPCL
मुख्य उद्देश्य बिजली बिल कलेक्शन + महिला रोजगार

*ये आंकड़े जागरण की रिपोर्ट में दिए गए हैं। अलग-अलग समय के अभियानों और स्रोतों में विद्युत सखियों की संख्या व कुल वसूली के आंकड़े अलग हो सकते हैं।

निष्कर्ष

विद्युत सखी योजना सिर्फ बिजली बिल वसूली का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का भी जरिया बन रही है। हजारों महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिलने के साथ बिजली उपभोक्ताओं को भुगतान की सुविधा मिल रही है। ₹3,500 करोड़ की वसूली और ₹45 करोड़ की आय का आंकड़ा इस मॉडल के बड़े पैमाने को दर्शाता है।

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