उत्तर प्रदेश
नैनोप्लास्टिक से पार्किंसन का खतरा बढ़ा, डिप्रेशन पर भी असर: सीमैप स्टडी


नैनोप्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को लेकर एक नई वैज्ञानिक स्टडी में चिंताजनक परिणाम सामने आए हैं। सीमैप (CIMAP) की रिसर्च के अनुसार, ये बेहद सूक्ष्म प्लास्टिक कण मानव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे पार्किंसन रोग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
अध्ययन में यह संकेत मिला है कि लंबे समय तक नैनोप्लास्टिक के संपर्क में रहने से न्यूरोलॉजिकल बदलाव हो सकते हैं, जो मूड डिसऑर्डर और डिप्रेशन जैसी स्थितियों से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र में अभी और विस्तृत शोध की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करना न केवल पर्यावरण, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। यह स्टडी भविष्य में नीति निर्धारण और जन-जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।