गोमती ग्रीन कॉरिडोर पर सवाल, प्रो. वेंकटेश दत्ता ने दिया इस्तीफा

गोमती नदी के संरक्षण और उसके आसपास चल रही विकास परियोजनाओं को लेकर लखनऊ में बहस तेज हो गई है। पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. वेंकटेश दत्ता ने ग्रीन कॉरिडोर परियोजना को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखते हुए जिला गंगा समिति से इस्तीफा दे दिया।
प्रो. दत्ता लंबे समय से गोमती नदी की पारिस्थितिकी, जल प्रवाह और बाढ़ क्षेत्र के संरक्षण को लेकर अपनी राय रखते रहे हैं। उनका कहना है कि नदी से जुड़ी किसी भी परियोजना में पर्यावरणीय पहलुओं और प्राकृतिक जल प्रवाह को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य गोमती के किनारे यातायात और कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। हालांकि, परियोजना के स्वरूप और नदी के पर्यावरण पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर पर्यावरणविदों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं।
प्रो. दत्ता के इस्तीफे से गोमती नदी के संरक्षण को लेकर चल रही बहस को और बल मिला है। उनका मानना है कि नदी के किनारे निर्माण और विकास कार्यों में दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन जरूरी है।
गोमती के पुनर्जीवन को लेकर सरकार और विभिन्न संस्थाओं की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। ऐसे में नदी संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
प्रो. वेंकटेश दत्ता के इस्तीफे के बाद अब ग्रीन कॉरिडोर परियोजना को लेकर पर्यावरणीय चिंताओं पर चर्चा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में परियोजना की पर्यावरणीय समीक्षा और इसके डिजाइन को लेकर भी सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे।



