वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा दें, त्योहारों पर खरीदें स्थानीय उत्पाद

उत्तराखंड में स्थानीय उत्पादों और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान लोगों को अधिक से अधिक स्थानीय उत्पाद खरीदने चाहिए। इससे प्रदेश के कारीगरों, हस्तशिल्पियों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने ‘सशक्त बहना उत्सव’ के दौरान स्वयं स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर लोगों को भी स्थानीय सामान अपनाने का संदेश दिया। इस आयोजन में महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार किए गए विभिन्न उत्पाद प्रदर्शित किए गए थे।
वोकल फॉर लोकल अभियान का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं की मांग बढ़ाना और उन्हें बाजार उपलब्ध कराना है। उत्तराखंड में पहाड़ी उत्पाद, हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र, स्थानीय खाद्य सामग्री और पारंपरिक वस्तुएं बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका से जुड़ी हैं।
स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ने से छोटे कारोबारियों और ग्रामीण उद्यमियों को अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिलता है। खासकर महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए ऐसे बाजार बेहद महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार ने भी SHG उत्पादों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए देहरादून में राज्य स्तरीय मार्केटिंग सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री की अपील त्योहारों के मौसम में स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। यदि लोग बाहर से आने वाले सामान की जगह अपने प्रदेश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, तो उसका आर्थिक लाभ स्थानीय स्तर पर ही रहने की संभावना बढ़ती है।
उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को पहचान दिलाने से पर्यटन को भी फायदा मिल सकता है। राज्य में आने वाले पर्यटक स्थानीय हस्तशिल्प और खाद्य उत्पादों को खरीदते हैं, जिससे कारीगरों और छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त बाजार मिलता है।
सरकार की ओर से स्थानीय उद्यमियों और महिला समूहों को प्रोत्साहित करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के जरिए भी प्रदेश में हजारों उद्यमियों और महिला समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
कुल मिलाकर CM धामी की ‘वोकल फॉर लोकल’ अपील का मकसद त्योहारों की खरीदारी को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। स्थानीय उत्पाद खरीदने से न केवल उत्तराखंड की पारंपरिक कला और संस्कृति को संरक्षण मिलेगा, बल्कि कारीगरों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।



