क्या 32 साल तक पूरी तरह विकसित नहीं होता दिमाग? कैंब्रिज स्टडी ने उम्र को लेकर फैला भ्रम तोड़ा

अक्सर यह कहा जाता है कि इंसान 18 या 21 साल की उम्र में पूरी तरह समझदार और परिपक्व हो जाता है, लेकिन हालिया कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से जुड़ी रिसर्च इस धारणा को चुनौती देती है। अध्ययन के अनुसार मानव मस्तिष्क का विकास एक लंबी प्रक्रिया है और यह पूरी तरह से 30 से 32 साल की उम्र के आसपास जाकर परिपक्व होता है। इसका मतलब यह नहीं कि इससे पहले इंसान ‘बच्चा’ होता है, बल्कि यह संकेत देता है कि दिमाग के कुछ अहम हिस्से, खासकर निर्णय लेने, भावनाओं को नियंत्रित करने और जोखिम समझने से जुड़े क्षेत्र, देर से विकसित होते हैं।
कैंब्रिज रिसर्च में बताया गया कि मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स—जो तर्क, योजना बनाने, आत्म-नियंत्रण और जिम्मेदार फैसलों के लिए जिम्मेदार होता है—सबसे अंत में परिपक्व होता है। यही कारण है कि 20 की उम्र में कई लोग भावनात्मक फैसले लेते हैं, जल्दी गुस्सा करते हैं या भविष्य के परिणामों पर पूरी तरह विचार नहीं कर पाते। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं कि युवा लोग गलत ही होते हैं, बल्कि उनका दिमाग सीखने और बदलने की अधिक क्षमता रखता है।
रिसर्च यह भी बताती है कि हर व्यक्ति का मानसिक विकास एक जैसा नहीं होता। सामाजिक वातावरण, शिक्षा, तनाव, जिम्मेदारियां और जीवन के अनुभव मस्तिष्क की परिपक्वता को तेज या धीमा कर सकते हैं। कुछ लोग 25 की उम्र में ही बेहद संतुलित और समझदार हो जाते हैं, जबकि कुछ को भावनात्मक स्थिरता पाने में ज्यादा समय लगता है। इसलिए उम्र को मानसिक परिपक्वता का एकमात्र पैमाना नहीं माना जा सकता।
इस अध्ययन का एक सकारात्मक पहलू यह है कि यह युवाओं को खुद को समझने का मौका देता है। यदि 30 की उम्र तक भी कभी-कभी असमंजस, भावनात्मक उतार-चढ़ाव या करियर को लेकर भ्रम महसूस होता है, तो यह असामान्य नहीं है। दिमाग लगातार सीख रहा होता है और अनुभवों से खुद को बेहतर बना रहा होता है।
निष्कर्ष रूप में कहा जाए तो 32 साल तक ‘मानसिक रूप से बच्चा’ रहना एक मिथक है। असल में यह उम्र मस्तिष्क की पूर्ण परिपक्वता की ओर इशारा करती है, जहां इंसान के फैसले, भावनाएं और सोच अधिक संतुलित हो जाती हैं। यह रिसर्च हमें धैर्य रखना, खुद पर काम करना और मानसिक विकास को एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करना सिखाती है।



