भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद पर अब चीन की ओर से एक सधी हुई प्रतिक्रिया सामने आई है। बीजिंग में विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि, “भारत के साथ सीमा विवाद एक जटिल और ऐतिहासिक मुद्दा है, जिसे सुलझाने में समय लगेगा।”
यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक और सैन्य स्तर की बातचीत लगातार हो रही है।
विशेष रूप से लद्दाख क्षेत्र में 2020 से चले आ रहे तनाव के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। हालांकि बातचीत जारी है और चीन ने संकेत दिए हैं कि वह शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत की ओर से बार-बार कहा गया है कि यथास्थिति बहाल होनी चाहिए और विश्वास की बहाली ज़रूरी है। चीन का यह ताज़ा बयान दर्शाता है कि अभी समाधान दूर है, लेकिन दोनों देश बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हैं।
भविष्य में यह देखने वाली बात होगी कि क्या ये बातचीत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति को सामान्य करने में सफल हो पाती है या नहीं।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का इतिहास दशकों पुराना है, लेकिन 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में नया तनाव आ गया। इस झड़प में दोनों पक्षों को नुकसान पहुंचा और उसके बाद से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों की तैनाती और निगरानी में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से आया यह बयान कि “यह एक जटिल मुद्दा है और इसे सुलझाने में समय लगेगा,” दरअसल यह दर्शाता है कि बीजिंग सीमा पर यथास्थिति बदलने के बाद पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। इस बयान का एक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि को संतुलित दिखाना भी हो सकता है, ताकि वह आक्रामक नहीं बल्कि ‘शांतिपूर्ण समाधान’ की बात करता दिखाई दे।
भारत ने साफ किया है कि जब तक LAC पर अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति बहाल नहीं होती, तब तक सामान्य द्विपक्षीय संबंध संभव नहीं हैं। भारत की सेना और विदेश मंत्रालय दोनों का यह रुख रहा है कि यथास्थिति बहाल किए बिना विश्वास बहाली असंभव है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता आया है कि सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकाला जाए।
अब तक दोनों देशों के बीच 20 से अधिक दौर की सैन्य वार्ताएं और कई राजनयिक बैठकों का आयोजन हो चुका है। कुछ क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है जैसे पैंगोंग झील और गोगरा पोस्ट, लेकिन कई अन्य इलाकों में तनाव बरकरार है। चीन की रणनीति को लेकर भारत में भरोसे की कमी है।



