मुंबई में भाषा को लेकर एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है। बिजनेसमैन सुशील केडिया द्वारा कथित रूप से “मराठी नहीं सीखूंगा” कहे जाने पर मनसे (MNS) कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यालय पर हमला कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए MNS के 5 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब केडिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें उन्होंने स्थानीय भाषा सीखने से इनकार कर दिया था। इसके बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इसे मराठी अस्मिता का अपमान बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया, जो हिंसक रूप में सामने आया। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
सुशील केडिया का “मैं मराठी नहीं सीखूंगा” बयान मराठी भाषी समाज में बेहद तीव्र प्रतिक्रिया का कारण बना। मुंबई, जो महाराष्ट्र की राजधानी है और जहां मराठी भाषा को सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है, वहां इस प्रकार का बयान कई लोगों की भावनाओं को आहत कर गया। MNS, जो हमेशा मराठी अस्मिता की बात करती रही है, ने इसे सीधा अपमान मानते हुए विरोध जताया।
घटना के बाद MNS कार्यकर्ताओं ने बिना देर किए सुशील केडिया के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन जल्द ही उग्र रूप ले गया और उनके ऑफिस पर तोड़फोड़ की गई। कुर्सियां, खिड़कियां और बोर्ड तोड़े गए। इस दौरान कुछ कर्मचारियों को धमकी भी दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने हालात को संभाला और पांच हमलावरों को गिरफ्तार किया।
जैसे ही यह मामला वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। एक वर्ग ने केडिया के बयान को गैरजरूरी और संवेदनहीन बताया, वहीं दूसरे वर्ग ने MNS की हिंसात्मक प्रतिक्रिया की आलोचना की। ट्विटर पर #मराठी_अस्मिता और #FreeSpeech जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूज़र्स ने सवाल उठाया कि क्या भाषा के नाम पर हिंसा जायज है?



