नेपाल और चीन की सीमा पर भारी बारिश के कारण बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आकर नेपाल-चीन के बीच का ‘मैत्री ब्रिज’ (Friendship Bridge) पूरी तरह से उफनाई नदी में बह गया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है, और अब तक 18 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बताया जा रहा है कि लापता लोग सीमा के दोनों ओर के नागरिक थे, जो पुल के आसपास के क्षेत्रों में रह रहे थे या यात्रा कर रहे थे।
बाढ़ के कारण कई गांवों का संपर्क कट गया है, और सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। नेपाल सरकार ने चीन के साथ मिलकर संयुक्त राहत और पुनर्वास कार्य शुरू करने की बात कही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारी बारिश और ग्लेशियर पिघलने के कारण सीमा क्षेत्र की नदियां अचानक उफान पर आ गईं, जिससे यह भीषण हादसा हुआ। इस ब्रिज को दोनों देशों की मैत्री का प्रतीक माना जाता था।
नेपाल के सिंधुपालचोक जिले में स्थित यह मैत्री ब्रिज न केवल दो देशों को जोड़ता था, बल्कि व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक रिश्तों का भी एक मजबूत माध्यम था। हर दिन सैकड़ों स्थानीय नागरिक इस पुल से आवाजाही करते थे। ऐसे में इसका बह जाना न केवल एक आर्थिक झटका है, बल्कि क्षेत्रीय लोगों के जीवन पर भी सीधा असर डालेगा।
नेपाल के गृह मंत्रालय ने बताया कि लापता लोगों में कुछ ट्रेडर्स, मजदूर और पर्यटक भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सेना के हेलीकॉप्टर्स से हवाई निगरानी की जा रही है।
चीन की ओर से भी सीमा पर स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है और वहां की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने नेपाली प्रशासन के साथ संयोजन स्थापित करने की पुष्टि की है। बाढ़ से करिब 7 पुल और कई सड़क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे राहत पहुंचाने में दिक्कत आ रही है।



