यूजीसी (University Grants Commission) ने रैगिंग को लेकर एक बड़ा फैसला लेते हुए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब यदि कोई सीनियर छात्र अपने जूनियर को WhatsApp, इंस्टाग्राम, फेसबुक या अन्य डिजिटल माध्यमों पर परेशान करता है, तो उसे रैगिंग की श्रेणी में गिना जाएगा और उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यूजीसी के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धमकाना, गाली देना, अभद्र मैसेज भेजना, या मानसिक दबाव डालना भी अब रैगिंग माने जाएंगे। संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस तरह की शिकायतों के लिए 24×7 हेल्पलाइन, एंटी-रैगिंग सेल और काउंसलिंग सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं।
इस कदम का उद्देश्य छात्रों को एक सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण देना है, जिसमें वे बिना डर के पढ़ाई कर सकें। यह नियम सिर्फ ऑन-कैंपस गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी ऑनलाइन इंटरैक्शन को भी कवर करता है।
UGC ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को चेताया है कि यदि कोई संस्थान रैगिंग की शिकायत को नजरअंदाज करता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और साइबर रैगिंग को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यूजीसी ने यह स्पष्ट किया है कि रैगिंग अब सिर्फ शारीरिक या मौखिक उत्पीड़न तक सीमित नहीं है। डिजिटल युग में छात्र सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय हैं, और इन माध्यमों से होने वाले मानसिक उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी कारण अब WhatsApp, Instagram, Facebook, Telegram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भेजे गए अपमानजनक संदेश, धमकी भरे कॉल या ग्रुप में अपमानजनक व्यवहार को भी रैगिंग माना जाएगा।
इन नए दिशा-निर्देशों के तहत सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र प्रवेश के समय ही एंटी-रैगिंग शपथ लें और उन्हें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई किसी भी अनुशासनहीनता को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही संस्थानों को छात्रों के व्यवहार की ऑनलाइन निगरानी के लिए तकनीकी सहायता और साइबर सेल से समन्वय करने की भी सलाह दी गई है।
यूजीसी ने यह भी निर्देश दिया है कि संस्थान एक एंटी-रैगिंग मोबाइल ऐप के जरिए छात्रों को शिकायत दर्ज करने की सुविधा दें। इससे पीड़ित छात्र बिना किसी डर के अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं। शिकायत करने वाले छात्रों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और कार्रवाई समयबद्ध तरीके से होगी।



