भारत ने 2024 में जिस तरह से G20 समिट की मेजबानी की और विभिन्न वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई, उसने न केवल देश की विदेश नीति को मजबूती दी बल्कि भारत की वैश्विक छवि को एक नया आयाम दिया। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब न केवल वैश्विक कूटनीति में एक प्रभावशाली भागीदार है, बल्कि तकनीक, पर्यावरण, सुरक्षा और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
G20 की अध्यक्षता ने भारत को पहली बार एक मंच दिया, जहां उसने वैश्विक नेताओं को एक मंच पर लाकर विकासशील देशों की आवाज़ को प्रमुखता दी। इस शिखर सम्मेलन में भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को वैश्विक पहचान मिली और क्लाइमेट एक्शन, डिजिटल ट्रांज़िशन व वैश्विक इक्विटी जैसे मुद्दों पर भारत की सोच को सराहा गया।
सिर्फ सम्मेलन की बात नहीं, बल्कि बीस से अधिक देशों में चलाए गए भारतीय मिशन—चाहे वह आपरेशन गंगा हो, वंदे भारत मिशन, या अफ्रीका और एशिया में चिकित्सा सहायता, सभी ने भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और ‘कूटनीतिक शक्ति’ को मजबूत किया है। इन अभियानों ने भारत को केवल सैन्य या आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि एक मानवीय शक्ति के रूप में भी स्थापित किया।
इसके साथ ही, भारत ने संयुक्त राष्ट्र, BRICS, QUAD जैसे मंचों पर भी अपनी स्थिति को और सुदृढ़ किया है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, और ग्रीन एनर्जी इनिशिएटिव्स ने न केवल घरेलू स्तर पर विकास को गति दी, बल्कि विदेशों में निवेशकों और रणनीतिक साझेदारों का विश्वास भी बढ़ाया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि भारत की वैश्विक स्वीकार्यता और नेतृत्व क्षमता में लगातार वृद्धि हो रही है, और दुनिया भारत को अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि एक स्थिर, सक्षम और नेतृत्वकारी शक्ति के रूप में देख रही है। अमेरिका, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ भारत के संबंधों में मजबूती इसका स्पष्ट प्रमाण हैं।
भारत की छवि में यह बदलाव सिर्फ सरकार की रणनीति का परिणाम नहीं है, बल्कि यह 130 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और एकजुटता की झलक है, जो देश को 21वीं सदी की एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं।



