बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार की एक और भयावह घटना सामने आई है, जहाँ एक हिंदू व्यापारी की निर्मम हत्या कर दी गई। यह व्यापारी पिछले कई महीनों से क्षेत्र के दबंगों और कट्टरपंथी तत्वों से रंगदारी की धमकियाँ झेल रहा था। स्थानीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब व्यापारी ने रंगदारी देने से इनकार किया, तो उसे योजनाबद्ध तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया। हत्या के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया है और हिंदू समुदाय में भय और गुस्से का माहौल है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या के आरोपियों के तार एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं, जो वर्तमान सरकार या विपक्ष का हिस्सा है। आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण पुलिस पर कार्रवाई न करने का दबाव बताया जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की माँग की है। बांग्लादेश सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बार-बार असफल हो रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू होना अब एक खतरा बन गया है? यह कोई पहली घटना नहीं है; इससे पहले भी कई बार मंदिरों पर हमले, व्यापारियों से रंगदारी और जान से मारने की धमकियाँ दी जाती रही हैं। लेकिन जब यह अपराध राजनीतिक शक्ति के संरक्षण में हो रहा हो, तब न्याय की उम्मीद करना और कठिन हो जाता है।
अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जा रहा है और भारत समेत कई देशों की नजर इस घटना पर बनी हुई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिलसिला और विकराल रूप ले सकता है। बांग्लादेश सरकार को न केवल दोषियों को सजा देनी होगी, बल्कि हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी — वरना यह सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता का प्रश्न बन जाएगा।



