छत्तीसगढ़ में हाईवे पर रील बनाना अब मज़ाक नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी मामला बन चुका है। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में कुछ युवाओं को तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच हाईवे पर खतरनाक अंदाज़ में रील बनाते हुए देखा गया, जिसे सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब इसकी शिकायत के बाद भी पुलिस द्वारा कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नाराज होकर एक जनहित याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दाखिल की गई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि जब ऐसा वीडियो खुलेआम वायरल हो रहा था, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कोर्ट ने कहा कि “सड़कें रील बनाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षित यात्रा के लिए हैं।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया के लिए इस तरह के कृत्य न केवल खुद के लिए जानलेवा हैं, बल्कि दूसरों की जान को भी खतरे में डालते हैं।
कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस तरह की घटनाओं को हल्के में न ले और तुरंत प्रभाव से कठोर कार्रवाई करें, ताकि आगे कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके। साथ ही, कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों को भी सलाह दी कि वे ऐसे खतरनाक वीडियो को प्रमोट न करें, और प्लेटफॉर्म पर उनकी उपस्थिति पर निगरानी रखें।
इस मामले ने सड़क सुरक्षा, सोशल मीडिया की ज़िम्मेदारी और प्रशासनिक सजगता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर युवा वर्ग में रील बनाने की होड़ लगी है, वहीं दूसरी ओर यह प्रवृत्ति अब जनजीवन और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।



