गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई गोरखपुर-बस्ती मंडल के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक में एक अनोखी व्यवस्था देखने को मिली। बैठक में शामिल होने वाले सभी सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों से उनके मोबाइल फोन बाहर ही जमा करवा लिए गए। इसका उद्देश्य था — बैठक में पूरी गंभीरता, गोपनीयता और ध्यान सुनिश्चित करना। इस व्यवस्था का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिस पर जनता के बीच चर्चाएं तेज हैं।
इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर और बस्ती मंडल के विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था, जनकल्याण योजनाओं की प्रगति, और जनसुनवाई की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक पूरी तरह से अनुशासित और व्यवस्थित रही। मोबाइल जमा कराए जाने की वजह से किसी का ध्यान भटका नहीं और सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पूरी तरह से मुख्यमंत्री की बातों को ध्यान से सुना।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि बैठक स्थल के बाहर एक टेबल पर मोबाइल जमा किए जा रहे हैं और सुरक्षा कर्मी उन्हें सूचीबद्ध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस दौरान पूरी सख्ती और अनुशासन के साथ सभी को संबोधित करते हुए नजर आए। उन्होंने साफ संदेश दिया कि जनता से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।
इस कदम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना भी हो रही है। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह फैसला आज की राजनीति में “फोकस और अनुशासन” की मिसाल है, वहीं कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में मोबाइल प्रतिबंध जरूरी है या नहीं। फिर भी, मुख्यमंत्री की इस कार्यशैली को प्रशासनिक दक्षता और परिणाम-आधारित गवर्नेंस के रूप में देखा जा रहा है।



