गोरखपुर में आयोजित एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के सांसद रवि किशन और एक स्थानीय महंत पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “कुछ जनप्रतिनिधि और धार्मिक व्यक्ति सार्वजनिक मंचों से बयानबाज़ी कर रहे हैं, जबकि खुद उनका घर नाले पर बना है। पहले खुद की सफाई करें, फिर दूसरों को सलाह दें।”
सीएम योगी का यह बयान रवि किशन पर सीधा हमला माना जा रहा है, जिनका आवास कथित तौर पर नगर निगम के रिकॉर्ड में नाले की ज़मीन पर दर्ज है। मुख्यमंत्री ने कहा, “अब कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सांसद है या कौन महंत — यदि अवैध निर्माण है तो उसे हटाया जाएगा। नाले पर कब्जा कर शहर को गंदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।”
योगी आदित्यनाथ ने चेतावनी देते हुए कहा कि जनता की आंखों में धूल झोंकने और सोशल मीडिया पर छवि चमकाने से विकास नहीं होता। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसी सभी निर्माणों की जांच की जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली में अब कोई भेदभाव नहीं होगा।
राजनीतिक गलियारों में योगी के इस बयान को भाजपा के भीतर ही एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो रवि किशन और महंत के बीच हालिया विवाद और कुछ बयानबाजियों को लेकर मुख्यमंत्री नाराज़ थे, और यह बयान उसी का नतीजा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सच में गोरखपुर में सांसद के आवास पर प्रशासनिक हथौड़ा चलता है या मामला राजनीतिक समझौतों में सुलझ जाता है।
यह बयान ना सिर्फ यूपी की राजनीति को गरमाने वाला है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि मुख्यमंत्री अब पार्टी के भीतर भी अनुशासन के नए मानक तय कर रहे हैं, और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है — चाहे वह सांसद हो या साधु।



