उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमाती दिख रही है। हाल ही में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी और उसके नेता अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “अखिलेश नाटक-नौटंकी कर रहे हैं। वे खुद गुंडों और माफियाओं के सरदार रहे हैं और अब बच्चों को वही पाठ पढ़ा रहे हैं।” यह बयान सपा द्वारा शुरू की गई ‘PDA पाठशाला’ योजना के जवाब में आया है, जिसे समाजवादी पार्टी अपने आगामी चुनावी रणनीति के तहत चला रही है।
PDA का मतलब सपा ने “पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक” बताया है, और इसके तहत पार्टी युवाओं को संविधान, सामाजिक न्याय और सपा के विचारों पर शिक्षित करने का दावा कर रही है। लेकिन भाजपा इसे एक राजनीतिक नौटंकी करार दे रही है। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि “जिनके शासन में यूपी में अपराधियों और माफियाओं का बोलबाला था, वे अब नैतिकता और संविधान की बातें कर रहे हैं। ये जनता को भ्रमित करने का प्रयास है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाजवादी पार्टी के राज में उत्तर प्रदेश जंगलराज में तब्दील हो गया था, जहाँ गुंडागर्दी, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार चरम पर था। ऐसे में आज जब वही लोग शिक्षा और सामाजिक चेतना की बात कर रहे हैं, तो यह केवल एक “राजनीतिक प्रहसन” से ज्यादा कुछ नहीं लगता।
केशव मौर्य ने तंज कसते हुए कहा कि PDA पाठशाला का असली मकसद युवाओं को भ्रमित करना है और उन्हें जातिवादी और तुष्टिकरण की राजनीति में उलझाए रखना है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इन “ढकोसलों” में न फंसें और वास्तविक विकास और सुशासन को चुनें।
भाजपा के नेताओं का मानना है कि समाजवादी पार्टी की ये रणनीतियाँ केवल चुनावी स्टंट हैं, जिनका कोई दीर्घकालिक उद्देश्य नहीं है। दूसरी ओर, सपा के नेता इस अभियान को जनता में बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण बता रहे हैं और इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक सार्थक प्रयास कह रहे हैं।
इस बयानबाज़ी के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयान और प्रतिवाद का दौर तेज़ हो गया है। आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटे सभी दल अपने-अपने पत्ते खोल रहे हैं और जनता को प्रभावित करने के लिए हर संभव रणनीति अपना रहे हैं।
आज के माहौल में यह स्पष्ट है कि “PDA पाठशाला” बनाम “गुंडा-माफिया” जैसे आरोप-प्रत्यारोप न सिर्फ जनता का ध्यान खींच रहे हैं, बल्कि चुनावी माहौल को भी गर्मा रहे हैं। अब देखना होगा कि जनता किसकी बातों में दम मानती है – शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के नाम पर चल रही सपा की पाठशाला या भाजपा की कानून-व्यवस्था आधारित आलोचना।



