सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन से पूछे तीखे सवाल | फंड और पारदर्शिता पर उठे सवाल
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में चल रही बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन से जुड़ी सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने मंदिर प्रबंधन समिति से बेहद तीखे और सीधे सवाल पूछे। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भगवान सबके हैं… आप क्यों चाहते हैं कि सारा फंड सिर्फ आपकी पॉकेट में जाए?” इस तीखी टिप्पणी ने पूरे धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में हलचल मचा दी है। सुप्रीम कोर्ट का यह बयान मंदिर फंड की पारदर्शिता और न्यायिक नियंत्रण को लेकर गंभीर संकेत देता है।
बांके बिहारी मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख और अत्यधिक पूजनीय मंदिरों में से एक है, जहाँ हर दिन हज़ारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं। अनुमानित रूप से करोड़ों रुपए का चढ़ावा हर साल मंदिर में आता है, लेकिन हाल के वर्षों में मंदिर प्रबंधन पर फंड के उपयोग और पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि मंदिर की आय का उपयोग अनियमित रूप से किया जा रहा है और प्रबंधन द्वारा इसकी जानकारी न तो श्रद्धालुओं को दी जाती है और न ही किसी स्वतंत्र संस्था द्वारा इसकी जांच होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लेते हुए यह भी कहा कि “धार्मिक स्थल जनता की आस्था के केंद्र होते हैं, इनका प्रबंधन निजी स्वार्थ से नहीं बल्कि जनहित और पारदर्शिता से होना चाहिए।” कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन से पूछा कि फंड का हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता और क्या इसे एक ट्रस्ट या सरकारी निगरानी में नहीं लाया जाना चाहिए?
आज यानी 5 अगस्त को फिर से इस मामले में सुनवाई होनी है, जिसमें कोर्ट मंदिर प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट और जवाब मांग सकता है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया था कि वह यह सुनिश्चित करे कि मंदिर की व्यवस्था में श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो और साथ ही, मंदिर की संपत्ति और फंड का दुरुपयोग रोका जाए।
इस पूरे घटनाक्रम ने धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का स्वागत किया है और मांग की है कि सभी बड़े मंदिरों की आय और व्यय का ऑडिट होना चाहिए और यह जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
वहीं, मंदिर प्रबंधन समिति ने फिलहाल इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अब सभी की निगाहें आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ यह तय हो सकता है कि मंदिर प्रबंधन में सुधार के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाएंगे।



