आलमबाग बस अड्डे पर किन्नरों का आतंक | वसूली, मारपीट और पुलिस की निष्क्रियता

लखनऊ का आलमबाग बस अड्डा, जो उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख परिवहन केंद्र है, इन दिनों एक अलग ही संकट से जूझ रहा है। यहां यात्रियों और बस चालकों को किन्नरों के आतंक का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतों के अनुसार, किन्नरों का एक गिरोह नियमित रूप से बसों में घुसकर जबरन वसूली करता है। जो यात्री या चालक इसका विरोध करते हैं, उनके साथ अभद्र भाषा में व्यवहार किया जाता है और कई बार मारपीट तक की जाती है। यह स्थिति न केवल यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता को भी उजागर करती है।
बस अड्डे पर हर दिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। मगर, उनके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द यह बन गया है कि बस के भीतर अचानक कुछ किन्नर चढ़ आते हैं, और तेज आवाज में पैसे मांगना शुरू कर देते हैं। पैसे न देने पर वे नाच-गाना छोड़कर गाली-गलौज करने लगते हैं, यहां तक कि महिला यात्रियों के सामने भी अशोभनीय व्यवहार किया जाता है। ड्राइवर और कंडक्टर को धमकाया जाता है कि यदि पैसे नहीं दिए, तो वे हंगामा करेंगे और बस को चलने नहीं देंगे।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई बार इस तरह की घटनाएं पुलिस की मौजूदगी में भी होती हैं, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। परिवहन विभाग और स्थानीय थाना प्रशासन से कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बस अड्डे पर तैनात सुरक्षा गार्ड भी असहाय नजर आते हैं, क्योंकि उनके पास हस्तक्षेप करने के अधिकार या साधन नहीं हैं।
इस समस्या का सबसे बुरा असर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ रहा है। यात्रा के दौरान उन्हें डर और असहजता का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, कुछ यात्रियों ने यह भी बताया कि वे अब आलमबाग से यात्रा करने से बचने लगे हैं, जिससे रोडवेज को भी राजस्व हानि हो रही है।
यह स्पष्ट है कि किन्नरों के नाम पर हो रही यह गुंडागर्दी सामाजिक संरचना और सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला है। समाज में किन्नरों के लिए संवेदना होनी चाहिए, लेकिन जब कुछ लोग इस पहचान का गलत इस्तेमाल कर कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हैं, तो सख्त कार्रवाई आवश्यक हो जाती है।
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे आलमबाग बस अड्डे की सुरक्षा को प्राथमिकता दें, और ऐसे तत्वों पर कानूनी शिकंजा कसें। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है और आम जनता का भरोसा शासन-प्रशासन से उठ जाएगा।



