
मुंबई स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। धमकी भरा फोन कॉल मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं और कोर्ट परिसर को तुरंत खाली करा दिया गया। पुलिस और बम स्क्वॉड की टीमें मौके पर पहुंचकर पूरे इलाके की तलाशी में जुट गईं। यह पहली बार नहीं है जब बॉम्बे हाईकोर्ट को इस तरह की धमकी दी गई हो। पिछले कुछ वर्षों में कई बार धमकी भरे कॉल्स और ईमेल्स मिलने के बाद कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है।
धमकी मिलने के बाद मुंबई पुलिस ने एहतियातन सभी गेट बंद कर दिए और अदालत परिसर में मौजूद वकीलों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बम डिटेक्शन एंड डिस्पोज़ल स्क्वॉड (BDDS) ने पूरी इमारत और आसपास के इलाकों की जांच की। हालांकि अब तक किसी संदिग्ध वस्तु का पता नहीं चला है, लेकिन पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
इस तरह की धमकियां न्यायिक संस्थाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक केंद्र है। यहां रोज़ाना हजारों लोग न्याय की तलाश में पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। यही वजह है कि मुंबई पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि मुंबई पहले भी कई बड़े आतंकी हमलों का गवाह रह चुका है। 26/11 जैसे हमले ने पूरी दुनिया को दहला दिया था। इसी पृष्ठभूमि में बॉम्बे हाईकोर्ट जैसे संवेदनशील संस्थान को बम से उड़ाने की धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे कॉल्स चाहे फर्जी ही क्यों न हों, लेकिन वे सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा अलर्ट साबित होते हैं।
फिलहाल पुलिस साइबर सेल और क्राइम ब्रांच इस बात की जांच कर रही है कि धमकी भरा फोन कॉल कहां से और किसने किया। कॉल करने वाले शख्स की लोकेशन और पहचान का पता लगाने के लिए तकनीकी मदद ली जा रही है। साथ ही पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।
यह घटना बताती है कि न्यायालय जैसे संस्थान लगातार सुरक्षा जोखिमों के घेरे में हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को अब इस दिशा में और ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और न्यायिक व्यवस्था बिना किसी डर के सुचारू रूप से चलती रहे।



