
उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर शुरू हुई कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। लखनऊ में दो साल पहले दर्ज हुआ हलाल सर्टिफिकेशन का पहला मामला अभी भी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच के अधीन है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर स्पष्ट कहा है कि उनकी सरकार ने राज्य में हलाल सर्टिफिकेशन को पूरी तरह से बैन कर दिया है, क्योंकि यह समानांतर व्यवस्था बनाकर लोगों को भ्रमित करने और समाज में विभाजन की भावना पैदा करने का प्रयास था।
जानकारी के अनुसार, हलाल सर्टिफिकेट देने वाले कुछ निजी संगठनों पर आरोप था कि वे बिना किसी वैधानिक अधिकार के मांस, दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों और अन्य उत्पादों पर “हलाल” टैग लगा रहे थे। इससे न केवल उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा था, बल्कि धार्मिक भावनाओं का भी दुरुपयोग किया जा रहा था। STF ने इस मामले में कई संदिग्ध संगठनों और व्यक्तियों से पूछताछ की है और उनके बैंक खातों व फंडिंग के स्रोतों की जांच जारी है।
CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “हमारी सरकार किसी भी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगी जो देश के संविधान या कानून के खिलाफ हो। हलाल सर्टिफिकेशन का काम सिर्फ सरकारी एजेंसियों का होना चाहिए, न कि किसी निजी संस्था का।” उन्होंने आगे कहा कि यह मामला सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक भी है, क्योंकि इस तरह के सर्टिफिकेट से समाज में भेदभाव की भावना फैलती है।
सूत्रों के अनुसार, STF जल्द ही अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है। इस रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि किस तरह से हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर एक समानांतर व्यापारिक तंत्र विकसित किया गया था। सरकार अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए कानूनी और प्रशासनिक कदम उठा रही है।
योगी सरकार के इस निर्णय को जनता का व्यापक समर्थन मिला है, क्योंकि यह कदम न केवल उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करेगा बल्कि राज्य में समानता और पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करेगा।



