
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी रैली के दौरान विपक्ष के दो प्रमुख नेताओं—राहुल गांधी और तेजस्वी यादव—पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “इस चुनाव में दो युवराजों ने झूठे वादों की दुकान खोल दी है, जिनका मकसद सिर्फ जनता को गुमराह करना है।” पीएम मोदी के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है और सोशल मीडिया पर भी यह टिप्पणी तेजी से वायरल हो रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि ये दोनों नेता चुनाव के वक्त तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब काम करने का समय आता है, तो गायब हो जाते हैं। उन्होंने बिना नाम लिए कांग्रेस और आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये पार्टियां विकास के नाम पर केवल वादों का व्यापार करती हैं, जबकि बीजेपी ‘विकास’ को धरातल पर उतारने का काम करती है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बिहार और देश की प्रगति के लिए चल रही योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार गरीबों के कल्याण और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए दिन-रात काम कर रही है। पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि वे ऐसी पार्टियों से सावधान रहें जो केवल वोट के लिए जनता से झूठ बोलती हैं और चुनाव खत्म होते ही गायब हो जाती हैं।
उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को “वंशवाद की राजनीति” का प्रतीक बताते हुए कहा कि “देश अब वंशवाद नहीं, विकासवाद चाहता है।” पीएम मोदी के इस बयान के बाद बीजेपी के कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिला। वहीं, विपक्षी दलों ने भी पलटवार करते हुए कहा कि मोदी सरकार खुद अपने वादों को पूरा नहीं कर पाई है।
चुनावी माहौल में पीएम मोदी का यह बयान निश्चित रूप से चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि बिहार और अन्य राज्यों के मतदाता इस बार किसके वादों पर भरोसा जताते हैं—“विकास के वादे” या “वंशवाद की राजनीति” पर आधारित भाषणों पर।



