
अमेरिका ने एक बार फिर प्रवासियों के लिए वर्क परमिट से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे भारतीय नागरिकों सहित लाखों विदेशी कामगार प्रभावित हो सकते हैं। बाइडेन प्रशासन ने हाल ही में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिनके तहत प्रवासियों के वर्क परमिट यानी Employment Authorization Document (EAD) के नवीनीकरण और जारी करने की प्रक्रिया में नई शर्तें जोड़ी गई हैं। बताया जा रहा है कि यह फैसला अमेरिकी श्रम बाजार की सुरक्षा और स्थानीय नागरिकों को रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
नए नियमों के अनुसार, वर्क परमिट के नवीनीकरण के लिए अब अधिक दस्तावेजों की आवश्यकता होगी और प्रक्रिया की समयसीमा भी बढ़ा दी गई है। पहले जहां कई प्रवासियों को अस्थायी रूप से स्वत: विस्तार मिल जाता था, अब उन्हें नए सिरे से आवेदन करना होगा और सभी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा। इसका सीधा असर उन भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा जो अमेरिका में H-1B, L-1, या OPT जैसे वीज़ा पर काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। भारतीय नागरिक अमेरिका में सबसे बड़ी विदेशी पेशेवर आबादी का हिस्सा हैं, और इनमें से अधिकांश लोग तकनीकी क्षेत्र में कार्यरत हैं। वर्क परमिट में देरी या नवीनीकरण की जटिल प्रक्रिया के चलते कई लोगों की नौकरी और रहने की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिकी इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि इस नए नियम से न केवल प्रवासियों की दिक्कतें बढ़ेंगी, बल्कि अमेरिकी कंपनियों को भी टैलेंट की कमी का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम घरेलू श्रमिकों के हितों की रक्षा करने और अवैध प्रवास को रोकने की दिशा में उठाया गया है।
भारतीय समुदाय अब उम्मीद कर रहा है कि भारत सरकार इस मुद्दे को राजनयिक स्तर पर उठाएगी, ताकि पहले से अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों को राहत मिल सके। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया नियम प्रवासियों और अमेरिकी कंपनियों दोनों पर किस तरह का प्रभाव डालता है।



