
छठ पूजा जैसे पवित्र पर्व पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल मच गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा छठ पूजा को लेकर दिए गए बयान — जिसमें उन्होंने इसे “ड्रामा” बताया था — पर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीखा पलटवार किया है। पीएम मोदी ने अपने खास अंदाज में जवाब देते हुए कहा, “जो लोग आस्था का मजाक उड़ाते हैं, वो जनता के दिलों से खुद को दूर कर लेते हैं। छठ सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि माताओं-बहनों की श्रद्धा, तप और विश्वास का प्रतीक है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में बिना नाम लिए राहुल गांधी पर निशाना साधा, लेकिन उनके शब्दों में संदेश बेहद स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत की संस्कृति और परंपराओं का अपमान करते हैं, उन्हें जनता जरूर सजा देगी। पीएम मोदी ने यह भी जोड़ा कि छठ पूजा बिहार, झारखंड, यूपी और दिल्ली समेत पूरे देश में हृदय से मनाई जाती है, और इसे “ड्रामा” कहना उन करोड़ों लोगों के विश्वास का अपमान है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जहां भाजपा समर्थकों ने पीएम मोदी के जवाब की तारीफ की, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान की कड़ी आलोचना जारी है। लोगों ने लिखा कि भारत की आस्था पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और किसी भी त्यौहार को “ड्रामा” कहना असंवेदनशील है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान आने वाले चुनावी माहौल में बड़ा मुद्दा बन सकता है। धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़े ऐसे विषयों पर राजनीति हमेशा गर्म रहती है। पीएम मोदी का यह जवाब न केवल कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करता है, बल्कि भाजपा समर्थकों के बीच धार्मिक एकजुटता को भी मजबूत करता है।
छठ पूजा भारतीय समाज में सूर्य उपासना का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है, जिसमें महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। ऐसे में इस पर की गई कोई भी नकारात्मक टिप्पणी स्वाभाविक रूप से विवाद को जन्म देती है। पीएम मोदी का यह बयान उसी जनभावना का प्रतिध्वनि है, जो देश की परंपराओं और आस्था के सम्मान की मांग करती है।



