
बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 14 नवंबर को होने वाले चुनाव को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। शाह ने कहा कि “14 नवंबर को महागठबंधन का सफाया हो जाएगा और बिहार की जनता विकास, सुरक्षा और स्थिरता के नाम पर फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को आशीर्वाद देगी।” उन्होंने खास तौर पर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि “राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष दिशाहीन और विचारहीन हो चुका है, उन्हें खुद नहीं पता कि वे क्या चाहते हैं और जनता क्या चाहती है।”
अमित शाह ने अपने बयान में कहा कि बीजेपी का लक्ष्य केवल सत्ता में आना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है — चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, रक्षा क्षेत्र हो या गरीब कल्याण योजनाएं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि “महागठबंधन केवल कुर्सी बचाने की राजनीति कर रहा है, जबकि भाजपा जनता के दिल में राज करने आई है।”
रैली में भारी जनसमर्थन को देखकर अमित शाह ने कहा कि यह भीड़ इस बात का संकेत है कि जनता अब झूठे वादों से ऊब चुकी है। उन्होंने महागठबंधन की नीतियों को विफल बताते हुए कहा कि “जनता अब विकास की राजनीति चाहती है, जाति और तुष्टिकरण की नहीं।”
राहुल गांधी पर प्रहार करते हुए शाह ने कहा कि “जो नेता अपनी पार्टी नहीं संभाल पा रहे, वे देश क्या संभालेंगे?” उन्होंने कांग्रेस और सहयोगी दलों पर आरोप लगाया कि वे केवल प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में एकजुट हैं, लेकिन उनके पास न तो कोई विजन है और न ही कोई नीति।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह का यह बयान आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के चुनाव प्रचार की दिशा तय करेगा। अब देखना यह होगा कि 14 नवंबर को जनता का फैसला किसके पक्ष में जाता है — विकास की राजनीति या विरोध की राजनीति के।



