
दुनिया में आज भी परमाणु हथियारों की ताकत अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार मानी जाती है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के 9 देशों के पास कुल 12,241 परमाणु हथियार हैं। इनमें से सबसे अधिक हथियार अमेरिका और रूस के पास हैं, जो मिलकर वैश्विक परमाणु शस्त्रागार का लगभग 90% हिस्सा रखते हैं। रूस के पास लगभग 5,580 परमाणु हथियार हैं, जबकि अमेरिका के पास करीब 5,044 हथियार हैं। इन दोनों देशों के बीच दशकों से चली आ रही हथियारों की होड़ आज भी दुनिया की शांति के लिए चुनौती बनी हुई है।
तीसरे स्थान पर चीन है, जिसके पास लगभग 500 परमाणु हथियार हैं और उसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। फ्रांस के पास करीब 290, ब्रिटेन के पास 225, जबकि इज़राइल के पास 90 परमाणु हथियार होने का अनुमान है। उत्तर कोरिया भी लगातार परमाणु परीक्षणों के जरिए अपनी शक्ति बढ़ा रहा है, उसके पास लगभग 50 हथियार बताए जाते हैं।
भारत और पाकिस्तान की बात करें तो भारत के पास लगभग 172 परमाणु हथियार हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 170 के करीब। यानी पाकिस्तान परमाणु ताकत के मामले में भारत से मामूली रूप से पीछे है, लेकिन दोनों देशों के बीच यह अंतर बहुत कम है। दोनों ही दक्षिण एशियाई देश अपने-अपने रक्षा कार्यक्रमों को लगातार मजबूत कर रहे हैं। भारत जहां आधुनिक मिसाइल सिस्टम, परमाणु पनडुब्बियों और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों पर काम कर रहा है, वहीं पाकिस्तान अपनी परमाणु क्षमता को संतुलित रखने की कोशिश में है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की नीति “नो फर्स्ट यूज़” (पहले प्रयोग न करने) पर आधारित है, जबकि पाकिस्तान ने कभी ऐसी नीति की औपचारिक घोषणा नहीं की है। यही वजह है कि दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन का मुद्दा हमेशा चर्चा में रहता है।
वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठन निरस्त्रीकरण की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण यह सपना अब तक अधूरा है। कुल मिलाकर, परमाणु हथियार आज भी ताकत, भय और रणनीतिक नियंत्रण का प्रतीक बने हुए हैं, और भारत-पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख हिस्सा हैं।



