
एशिया के कई देशों में गुरुवार देर रात धरती हिलने से अफरा-तफरी मच गई। चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में एक साथ भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 6.3 मापी गई और इसका केंद्र अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र में था। भूकंप का प्रभाव इतना गहरा था कि इसके झटके पाकिस्तान के इस्लामाबाद, पेशावर, लाहौर समेत कई हिस्सों और चीन के शिनजियांग क्षेत्र तक महसूस किए गए।
रात करीब 10 बजकर 47 मिनट पर आए इस भूकंप के बाद लोगों में दहशत फैल गई। कई शहरों में बिजली के खंभे और इमारतें हिलने लगीं, जबकि ऊंची इमारतों में रह रहे लोगों को भारी झटके महसूस हुए। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें लोग घरों और दफ्तरों से बाहर भागते दिखाई दे रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में हल्का नुकसान दर्ज किया गया है, लेकिन किसी बड़े जनहानि की खबर फिलहाल नहीं मिली है।
अफगानिस्तान के भूकंप विज्ञान विभाग के अनुसार, भूकंप का केंद्र हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला में जमीन से लगभग 190 किलोमीटर की गहराई पर था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह इलाका भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, जहां अक्सर मध्यम से तेज तीव्रता के झटके आते रहते हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने कहा कि देश के उत्तरी इलाकों में भूकंप के झटके काफी तेज महसूस किए गए, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है।
चीन के सीमावर्ती इलाकों में भी कई इमारतों में हल्की दरारें देखी गईं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लोगों को कुछ समय के लिए खुले स्थानों में रहने की सलाह दी है। भूकंप के बाद किसी भी आफ्टरशॉक (Aftershock) की संभावना से इनकार नहीं किया गया है, इसलिए स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
भूविज्ञानियों का कहना है कि हिमालयी और हिंदूकुश क्षेत्र में प्लेटों की टकराहट के कारण इस तरह के भूकंप लगातार आते रहते हैं। पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान में ऐसे भूकंपों ने भारी तबाही मचाई थी।



