
भारतीय राजनीति में बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाया है। बीजेपी का दावा है कि राहुल गांधी विदेशों में बैठे कुछ खास समूहों और “प्रचार तंत्र” के जरिए पीएम मोदी, केंद्रीय सरकार और भारत की छवि के खिलाफ नैरेटिव तैयार करवा रहे हैं। यह आरोप राजनीतिक हलकों में गहन चर्चा का विषय बन गया है और 2025 के राजनीतिक माहौल को और गर्माता हुआ दिख रहा है।
बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी लगातार विदेशी मंचों पर जाकर भारत की आलोचना करते हैं, और इससे देश की वैश्विक छवि खराब होती है। पार्टी ने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय संगठनों, विदेशी पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क में है, जो भारत के भीतर की परिस्थितियों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं। बीजेपी के अनुसार, यह रणनीति सरकार को बदनाम करने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि दुनिया आज भारत को उभरती हुई शक्ति के रूप में देख रही है—चाहे मामला अर्थव्यवस्था का हो, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का या वैश्विक नेतृत्व का। ऐसे में विदेशी जमीन पर भारत के खिलाफ बयान देना सिर्फ राजनीतिक तौर पर गलत नहीं, बल्कि देशहित के खिलाफ भी है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए “विदेशी समर्थन” का सहारा ले रहा है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी सिर्फ लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठाते हैं, जो उनका संवैधानिक अधिकार है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी हर आलोचना को ‘भारत विरोध’ बताकर लोकतांत्रिक बहस को दबाने की कोशिश करती है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अगर सरकार अपने काम में पारदर्शी हो, तो उसे किसी भी सवाल से डरने की जरूरत नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद 2025-26 के चुनावी माहौल का हिस्सा है। सोशल मीडिया, विदेशी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेताओं के बयान अब घरेलू राजनीति को सीधे प्रभावित करते हैं। ऐसे में दोनों पक्ष अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।
फिलहाल यह मुद्दा आगे और कितना उछलेगा, यह आने वाले दिनों की राजनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा। लेकिन इतना तय है कि ‘विदेशी नैरेटिव’ बनाम ‘राष्ट्रीय छवि’ का यह विवाद भारतीय राजनीति में लंबे समय तक गूंजता रहेगा।



