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हैंडमेड पश्मीना आर्ट की भव्यता पर मुकेश-नीता अंबानी हुए मुग्ध, कश्मीर की कारीगरी की जमकर सराहना

हैंडमेड पश्मीना आर्ट की बेजोड़ खूबसूरती और कारीगरों की महीन मेहनत एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गई है। देश के जाने-माने उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता अंबानी ने हाल ही में पश्मीना शिल्प की शानदार कारीगरी को करीब से देखा और उसकी दिल खोलकर तारीफ की। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प को भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि पश्मीना केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही मेहनत, धैर्य और कला का प्रतीक है।

मुकेश अंबानी ने कहा कि कश्मीरी कारीगरों द्वारा हाथ से तैयार की गई पश्मीना शॉल में जो बारीकी और संवेदनशीलता नजर आती है, वह मशीन से बने किसी भी उत्पाद में संभव नहीं है। हर धागे में कारीगर की साधना और अनुभव झलकता है, जो इसे वैश्विक स्तर पर विशिष्ट बनाता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे हस्तशिल्प को प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि स्थानीय कारीगरों की आजीविका मजबूत हो और आने वाली पीढ़ियां भी इस कला को आगे बढ़ा सकें।

नीता अंबानी ने पश्मीना आर्ट की तारीफ करते हुए कहा कि इसकी नाजुक बुनावट और डिजाइन भारतीय परंपरा की गहराई को दर्शाती है। उन्होंने माना कि पश्मीना शॉल सिर्फ पहनने की वस्तु नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा और उसकी विविध सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है। नीता अंबानी ने महिलाओं कारीगरों की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि उनके हुनर और समर्पण से यह कला और भी जीवंत बनती है।

अंबानी दंपति ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब फैशन तेजी से बदल रहा है, तब हैंडमेड पश्मीना जैसी कलाएं सस्टेनेबल लग्ज़री का उदाहरण पेश करती हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे पारंपरिक शिल्प को अपनाएं और उसे आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाएं। कुल मिलाकर, मुकेश और नीता अंबानी की यह सराहना न सिर्फ कश्मीरी पश्मीना कारीगरों के लिए सम्मान की बात है, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में भी एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

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