पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पर अमित शाह का वार, बोले– तृणमूल शासन में जनता डरी हुई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि आज पश्चिम बंगाल की पहचान भय और भ्रष्टाचार से जुड़ गई है। अमित शाह के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी तेज हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
अमित शाह ने कहा कि राज्य में चुनाव आते ही हिंसा, धमकी और अराजकता का माहौल बन जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी कार्यकर्ताओं को डराया जाता है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर किया जा रहा है। गृह मंत्री के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा अब सामान्य बात बन चुकी है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार बार-बार राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था सुधारने की सलाह देती रही है, लेकिन उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर बड़े घोटालों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला घोटाला और राशन वितरण में अनियमितताएं इस बात का सबूत हैं कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। शाह ने दावा किया कि इन मामलों में कई बड़े नेता जांच एजेंसियों के घेरे में हैं, जिससे सरकार की साख पर सवाल उठते हैं।
अमित शाह ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हमेशा केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र का उद्देश्य किसी राज्य सरकार को परेशान करना नहीं, बल्कि देश में कानून का राज स्थापित करना है। अगर कहीं भ्रष्टाचार या अपराध होता है, तो जांच एजेंसियां अपना काम करेंगी।
इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है। पार्टी पहले भी अमित शाह और बीजेपी पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने के आरोप लगाती रही है। वहीं, बीजेपी नेताओं का कहना है कि पश्चिम बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है और भय व भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने के लिए तैयार है।
कुल मिलाकर, अमित शाह का यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति को और गरमा सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोप-प्रत्यारोपों का असर राज्य की सियासत और जनता के मूड पर किस तरह पड़ता है।



