यूपी में स्टांप ड्यूटी छूट का असर: गिफ्ट डीड बढ़ीं, अब व्यावसायिक संपत्तियों को भी फायदा

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्टांप ड्यूटी में दी गई छूट का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। खासतौर पर पारिवारिक संपत्तियों के हस्तांतरण में गिफ्ट डीड की संख्या तेजी से बढ़ी है। पहले जहां संपत्ति ट्रांसफर के दौरान अधिक स्टांप ड्यूटी एक बड़ी बाधा बनती थी, वहीं अब इस छूट ने लोगों को कानूनी और पारदर्शी तरीके से संपत्ति अपने परिजनों के नाम करने के लिए प्रोत्साहित किया है। माता-पिता द्वारा बच्चों के नाम, पति-पत्नी के बीच या अन्य करीबी रिश्तेदारों के बीच गिफ्ट डीड के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे न केवल पारिवारिक विवादों में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि सरकार के लिए भी राजस्व संग्रह का एक स्थिर और वैध रास्ता खुला है।
इस नीति का दायरा अब केवल आवासीय संपत्तियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यावसायिक संपत्तियों को भी इसका लाभ मिलने लगा है। दुकान, गोदाम, ऑफिस स्पेस और अन्य कमर्शियल प्रॉपर्टी के मालिक अब कम स्टांप ड्यूटी के कारण अपने व्यवसाय से जुड़ी संपत्तियों का हस्तांतरण या पुनर्गठन आसानी से कर पा रहे हैं। इससे छोटे और मध्यम व्यापारियों को विशेष राहत मिली है, जो पहले अधिक लागत के कारण ऐसे फैसले टालते रहते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से रियल एस्टेट सेक्टर में भी नई ऊर्जा आएगी और बाजार में लेन-देन की संख्या बढ़ेगी।
स्टांप ड्यूटी में छूट का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि लोग अब बेनामी या अनौपचारिक तरीकों से बचते हुए रजिस्टर्ड दस्तावेजों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे संपत्ति का रिकॉर्ड दुरुस्त होगा और भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना कम होगी। वहीं सरकार को भी लंबी अवधि में टैक्स और शुल्क के रूप में बेहतर राजस्व मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यूपी में स्टांप ड्यूटी में दी गई यह राहत न केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने में सहायक साबित हो रही है, बल्कि व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने का काम कर रही है।



