PM Kisan Yojana 22वीं किस्त: किराए पर खेती करने वाले किसानों को मिलेगा लाभ या नहीं? नियम स्पष्ट

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) देश के छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देने की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत पात्र किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपये की राशि तीन बराबर किस्तों में दी जाती है। अब जब 22वीं किस्त को लेकर चर्चा तेज है, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वे किसान जो अपनी जमीन के बजाय दूसरों की जमीन पर किराए, बटाई या ठेके पर खेती करते हैं, उनके खाते में भी यह किस्त आएगी या नहीं। योजना के नियमों के अनुसार PM किसान योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलता है जिनके नाम पर कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व दर्ज हो। यानी किसान का नाम राजस्व रिकॉर्ड, जैसे खतौनी या जमाबंदी में दर्ज होना अनिवार्य है। ऐसे में जो किसान दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं, लेकिन उस जमीन के मालिक नहीं हैं, वे सामान्य तौर पर इस योजना के दायरे में नहीं आते। सरकार का तर्क है कि योजना का उद्देश्य भूमि स्वामी किसानों को सहायता देना है, ताकि वे खेती से जुड़ी जरूरतों को पूरा कर सकें। हालांकि, कुछ राज्यों में बटाईदार या पट्टेदार किसानों को लेकर अलग-अलग नियम और योजनाएं लागू हैं, लेकिन PM किसान योजना एक केंद्रीय योजना होने के कारण इसमें पूरे देश के लिए समान पात्रता नियम लागू होते हैं। यदि कोई किसान किराए पर ली गई जमीन पर खेती कर रहा है और उसका नाम भूमि रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, तो उसे 22वीं किस्त समेत किसी भी किस्त का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, अगर किसी किसान ने जमीन लीज पर ली है और स्थानीय नियमों के तहत उसका नाम आधिकारिक तौर पर खेती करने वाले के रूप में दर्ज है, तो ऐसे मामलों में राज्य सरकार की सिफारिश और रिकॉर्ड के आधार पर पात्रता तय हो सकती है। इसके अलावा, योजना का लाभ पाने के लिए ई-केवाईसी पूरा होना, बैंक खाते का आधार से लिंक होना और भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन भी जरूरी शर्तें हैं। इसलिए दूसरों की जमीन पर खेती करने वाले किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने राज्य के कृषि विभाग या लेखपाल से संपर्क कर यह जानकारी लें कि क्या उनका नाम किसी आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कराया जा सकता है या नहीं। कुल मिलाकर, मौजूदा नियमों के अनुसार PM किसान योजना की 22वीं किस्त मुख्य रूप से भूमि स्वामी किसानों के लिए है, जबकि किराए या बटाई पर खेती करने वाले किसानों को इससे बाहर रखा गया है, जब तक कि उनके नाम पर वैध भूमि रिकॉर्ड मौजूद न हो।



