
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है, लेकिन समझौते की राह में बार-बार अड़चनें सामने आ रही हैं। अब इस पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ही पार्टी के एक सांसद ने बड़ा बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। सांसद के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील में बाहरी नहीं, बल्कि अमेरिका के भीतर मौजूद कुछ प्रभावशाली चेहरे ही सबसे बड़ी रुकावट बन रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर जेडी वेंस, पीटर नवारो और कभी-कभी खुद ट्रंप की भूमिका का जिक्र किया है।
सांसद का कहना है कि भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की इच्छा दोनों देशों में है, लेकिन अमेरिका के अंदर “हार्डलाइन” सोच रखने वाले कुछ नेता हर मुद्दे को राष्ट्रवाद और घरेलू राजनीति के चश्मे से देखते हैं। पीटर नवारो, जो पहले भी चीन और अन्य देशों के खिलाफ सख्त रुख के लिए जाने जाते रहे हैं, भारत के साथ डील में भी टैरिफ और मार्केट एक्सेस को लेकर कठोर रुख अपनाए हुए हैं। वहीं जेडी वेंस जैसे नेता अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और नौकरियों के नाम पर समझौते के कई बिंदुओं पर आपत्ति जता रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत चाहता है कि आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल और कृषि जैसे क्षेत्रों में उसे बेहतर बाजार पहुंच मिले, जबकि अमेरिका डेयरी, डिजिटल ट्रेड और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर ज्यादा रियायतें चाहता है। लेकिन आंतरिक मतभेदों के कारण अमेरिकी पक्ष एक स्पष्ट और एकजुट रुख नहीं बना पा रहा है। सांसद ने यहां तक कहा कि कई बार खुद ट्रंप भी राजनीतिक दबावों के चलते समझौते को आगे बढ़ाने के बजाय सख्त बयानबाजी को तरजीह देते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह ट्रेड डील होती है तो दोनों देशों को बड़ा फायदा मिल सकता है। भारत को निवेश, तकनीक और निर्यात के नए अवसर मिलेंगे, जबकि अमेरिका को एशिया में एक मजबूत और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार मिलेगा। हालांकि, अमेरिका की घरेलू राजनीति, आगामी चुनाव और “अमेरिका फर्स्ट” जैसी सोच इस प्रक्रिया को धीमा कर रही है।
कुल मिलाकर, ट्रंप के सांसद के इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की राह में सबसे बड़ी चुनौती कूटनीति नहीं, बल्कि अमेरिकी सत्ता के भीतर चल रही खींचतान है। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में व्यावहारिक सोच हावी होती है या राजनीतिक मतभेद इस अहम समझौते को और लटकाते हैं।



