Union Budget 2026: आर्थिक सर्वे से बजट सत्र के समापन तक क्या-क्या होगा, पूरी टाइमलाइन

Union Budget 2026 को लेकर देशभर में उत्सुकता चरम पर है और इसकी औपचारिक शुरुआत आर्थिक सर्वेक्षण से होती है। परंपरा के अनुसार बजट से एक दिन पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है, जिसमें बीते वित्त वर्ष की आर्थिक स्थिति, विकास दर, महंगाई, रोजगार, राजकोषीय घाटा और वैश्विक आर्थिक हालात का विस्तृत विश्लेषण होता है। यह दस्तावेज़ सरकार के लिए बजट का रोडमैप तैयार करता है और आने वाले वर्ष की प्राथमिकताओं की झलक देता है। इसके अगले दिन केंद्रीय वित्त मंत्री लोकसभा में Union Budget 2026 पेश करते हैं, जिसमें आयकर स्लैब, कॉरपोरेट टैक्स, सब्सिडी, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए आवंटन की घोषणा की जाती है। बजट भाषण के बाद सरकार संसद में बजट दस्तावेज़ रखती है, जिन पर विस्तृत चर्चा शुरू होती है। बजट सत्र के दौरान विभिन्न मंत्रालयों के अनुदान मांगों (Demands for Grants) पर चर्चा होती है, जहां सांसद सवाल उठाते हैं और सरकार अपनी नीतियों का बचाव करती है। इसी चरण में स्थायी समितियां संबंधित मंत्रालयों के बजट का परीक्षण करती हैं और अपनी रिपोर्ट पेश करती हैं। इसके बाद वित्त विधेयक (Finance Bill) और विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) पर चर्चा और मतदान होता है, जो बजट को कानूनी मंजूरी देता है। बजट सत्र के दौरान शून्यकाल और प्रश्नकाल में भी आर्थिक मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिलती है, जिससे आम जनता को सरकार की प्राथमिकताओं और विपक्ष के सवालों की स्पष्ट तस्वीर मिलती है। आमतौर पर बजट सत्र दो चरणों में आयोजित होता है—पहला चरण बजट प्रस्तुति और प्रारंभिक चर्चा के लिए, जबकि दूसरा चरण अनुदान मांगों पर विस्तृत बहस और विधेयकों की मंजूरी के लिए होता है। जब वित्त विधेयक संसद से पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल जाती है, तब Union Budget 2026 औपचारिक रूप से लागू माना जाता है। इस तरह आर्थिक सर्वेक्षण से लेकर बजट सत्र के समापन तक की पूरी प्रक्रिया न केवल सरकार की आर्थिक दिशा तय करती है, बल्कि उद्योग, निवेशक, करदाता और आम नागरिक सभी के लिए आने वाले वर्ष की उम्मीदों और चुनौतियों को भी स्पष्ट करती है।



